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‘क्या परीक्षा के दौरान कंप्यूटर हैक होना संभव है?’ झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC से मांगा कड़ा जवाब, दोबारा परीक्षा की वैधता पर उठे सवाल

रांची/झारखंड ( अभिषेक सिंह) : झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के भविष्य और सिस्टम की पारदर्शिता को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कंप्यूटर आधारित प्रतियोगी परीक्षाओं (CBT) में कथित धांधली और पेपर लीक के मामलों की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से तीखे सवाल किए हैं। अदालत ने आयोग की सुरक्षा प्रणाली पर संदेह जताते हुए पूछा है— “क्या यह संभव है कि ऑनलाइन परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर हैक किए जा सकें?”

हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी और जवाब-तलब
सुनवाई के दौरान अदालत ने JSSC की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। हाई कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दायर कर यह स्पष्ट करे कि क्या परीक्षा के दौरान सिस्टम को हैक किया जाना तकनीकी रूप से संभव है? अदालत ने यह भी पूछा कि यदि ऐसी कोई संभावना है, तो इसे रोकने के लिए आयोग और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी के पास क्या पुख्ता तकनीकी सुरक्षा उपाय (Firewalls, Encryption आदि) मौजूद हैं।

दोबारा परीक्षा (Re-exam) की वैधता पर उठे सवाल
अदालत ने अपना दायरा केवल हैकिंग की संभावनाओं तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद बार-बार दोबारा परीक्षा (Re-exam) आयोजित करने की प्रक्रिया और उसकी वैधता पर भी सवाल उठाए। अदालत का साफ मानना था कि जब तक परीक्षा प्रणाली की मूल तकनीकी खामियों और सुरक्षा लूपहोल्स (Loopholes) को पूरी तरह से दूर नहीं किया जाता, तब तक दोबारा परीक्षा कराना बेमानी है। इससे सिर्फ सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है और छात्रों का समय व मनोबल बर्बाद होता है।

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि हाल के दिनों में JSSC द्वारा आयोजित कई बड़ी परीक्षाओं में व्यापक धांधली के आरोप लगे हैं। कई छात्रों और याचिकाकर्ताओं ने साक्ष्यों के साथ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका आरोप है कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर बाहरी सर्वर या रिमोट एक्सेस सॉफ़्टवेयर (जैसे AnyDesk या TeamViewer) की मदद से कंप्यूटर सिस्टम को हैक कर लिया गया और अयोग्य उम्मीदवारों को बाहर से प्रश्नों के उत्तर सॉल्व कराए गए। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा आयोजित करने के लिए जिस आउटसोर्स एजेंसी को ठेका दिया गया था, उसके केंद्रों पर सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी हुई है।

आउटसोर्सिंग एजेंसी की भूमिका संदेह के घेरे में
इस पूरे विवाद में परीक्षा आयोजित कराने वाली प्राइवेट एजेंसी की कार्यप्रणाली सबसे अधिक सवालों के घेरे में है। अदालत यह जानना चाहती है कि क्या एजेंसी के सर्वर और सॉफ्टवेयर में जानबूझकर ऐसी कमियां छोड़ी गईं जिनका फायदा शिक्षा माफिया उठा सकें? अगर एजेंसी की ओर से लापरवाही हुई है, तो जेएसएससी ने उस पर अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की है?

झारखंड हाई कोर्ट का यह सख्त रवैया उन हजारों ईमानदार छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है, जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं लेकिन भ्रष्टाचार के कारण नौकरी से वंचित रह जाते हैं। अब सभी की निगाहें JSSC के जवाब पर टिकी हैं। आयोग का जवाब ही तय करेगा कि राज्य में भविष्य की भर्ती परीक्षाओं का स्वरूप कैसा होगा और युवाओं का सिस्टम पर से उठा भरोसा कैसे वापस लौटेगा।