‘गैर-मिजो से शादी पर छिन जाते हैं महिलाओं के अधिकार’, मिजोरम के मैरिज एक्ट के खिलाफ SC में याचिका दायर

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली/आइजोल: मिजोरम के ‘मिजो मैरिज, डिवोर्स एंड इनहेरिटेंस ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 2014’ (और इसके हालिया 2026 संशोधनों) को चुनौती देने वाली एक अहम याचिका हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह याचिका कांग्रेस नेता और एंटरप्रेन्योर मेरियम एल. ह्रांगचल द्वारा दायर की गई है। याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि यह कानून उन मिजो महिलाओं के अधिकारों का हनन करता है, जो अपने समुदाय से बाहर (गैर-मिजो पुरुष से) शादी करती हैं।
क्या है पूरा मामला और विवाद की वजह?
मिजोरम का यह विवाह और संपत्ति विरासत कानून प्रथागत कानूनों (Customary Laws) पर आधारित है। याचिकाकर्ता मेरियम एल. ह्रांगचल का कहना है कि:
- अगर कोई मिजो महिला किसी गैर-मिजो व्यक्ति से शादी करती है, तो इस कानून के तहत उसके कई अधिकार छिन जाते हैं।
- ऐसे प्रावधानों का सीधा असर उन महिलाओं और उनके बच्चों पर पड़ता है। मिजो समुदाय से जुड़े होने के बावजूद, बच्चों को इस कानूनी और संपत्ति विरासत व्यवस्था से बाहर कर दिया जाता है।
- याचिका में दावा किया गया है कि यह कानून पुरुषों के पक्ष में झुका हुआ है और पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है।
- इसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 21 (सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय याचिकाकर्ता को एक अहम निर्देश दिया:
- पीठ ने याचिकाकर्ता की वकील से कहा कि जब इलाके में पहले से ही एक सक्षम हाई कोर्ट मौजूद है, तो उन्हें सीधे दिल्ली आने की क्या आवश्यकता है?।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट इसी तरह के मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए हैं और इस मुद्दे पर वहीं याचिका दायर की जा सकती है।
- याचिकाकर्ता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से यह अनुरोध किया है कि वे इस याचिका को आइजोल बेंच को भेजने के बजाय गुवाहाटी में ही सुनें।
कानून का महत्व और हालिया बदलाव
गौरतलब है कि मिजोरम सरकार ने हाल ही में ‘द मिजो मैरिज एंड इनहेरिटेंस ऑफ प्रॉपर्टी (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026’ के जरिए मुख्य कानून में कुछ संशोधन किए थे। जहां एक ओर इस अधिनियम ने बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लगाने जैसा ऐतिहासिक कदम उठाया है, वहीं दूसरी ओर अंतर-सामुदायिक विवाह करने वाली महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को लेकर यह विवादों में घिर गया है।
मिजोरम का यह मामला आदिवासी प्रथागत कानूनों और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के बीच एक बड़े टकराव को सामने लाता है। अब सभी की निगाहें गुवाहाटी हाई कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या कोई पारंपरिक कानून महिलाओं के समानता और स्वतंत्रता के मूल अधिकारों से ऊपर हो सकता है।