‘खतरों के बड़ा होने से पहले ही उनकी पहचान कर उन्हें खत्म करें’: राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में अमित शाह का सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली
देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने अपना रुख बेहद स्पष्ट और आक्रामक कर लिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों से आग्रह किया है कि वे खतरों के बड़ा होने से पहले ही उनकी पहचान करें और उन्हें खत्म करें। यह कड़ा निर्देश इस बात का संकेत है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर अब रक्षात्मक (defensive) के बजाय सक्रिय (proactive) नीति अपना रही है।
गृह मंत्री 25 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो के ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन’ के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस उच्च-स्तरीय सम्मेलन में देश की शीर्ष खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी मौजूद थे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए, गृह मंत्री ने कहा कि भारत की सुरक्षा नीति को उभरती वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाना चाहिए। आज की दुनिया में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते, बल्कि वे डिजिटल स्पेस और आर्थिक मोर्चों पर भी लड़े जा रहे हैं।
अमित शाह ने इन उभरती चुनौतियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित भी किया। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों में भू-राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा और संसाधन असुरक्षा, बढ़ता कट्टरपंथ और साइबर दुष्प्रचार अभियान शामिल हैं। इन नई सदी के खतरों से निपटने के लिए एजेंसियों को पारंपरिक पुलिसिंग और खुफिया तंत्र से आगे बढ़कर तकनीकी रूप से अधिक उन्नत और सतर्क होने की आवश्यकता है। यह सम्मेलन भारत के सुरक्षा ढांचे को ‘भविष्य के लिए तैयार’ (future-ready) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक नींव रखता है।