राजस्व सुधार पर देश का नेतृत्व कर सकता है तमिलनाडु: सीएम विजय से मिली मोंटेक सिंह अहलूवालिया की उच्च-स्तरीय समिति

विवेक ओझा
चेन्नई
आर्थिक सुधारों और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की दिशा में तमिलनाडु सरकार एक बेहद प्रगतिशील कदम उठा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि अपनी नई नीतियों के साथ तमिलनाडु राजस्व सुधार के मामले में पूरे भारत का नेतृत्व कर सकता है।
राज्य के वित्तीय ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए, तमिलनाडु सरकार ने राजस्व को परिभाषित करने के तरीके को आधुनिक बनाने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति की स्थापना करने का निर्णय लिया है। इस समिति का मुख्य काम राज्य के राजस्व स्रोतों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना और कर्ज पर निर्भरता कम करना है।
इसी कड़ी में, 13 अगस्त, 2026 को चेन्नई सचिवालय में एक अहम बैठक हुई। तमिलनाडु सरकार की राजस्व संवर्धन समिति के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया और समिति के अन्य सदस्यों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात की। मोंटेक सिंह अहलूवालिया जैसे दिग्गज अर्थशास्त्री का इस समिति का नेतृत्व करना दर्शाता है कि राज्य सरकार आर्थिक सुधारों को लेकर कितनी गंभीर है।
राजस्व सुधार की इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बुनियादी आर्थिक सिद्धांत काम कर रहा है। दरअसल, एक बाज़ार ऋण या बांड आज नकदी प्रदान करता है, लेकिन साथ ही वह एक वित्तीय देयता (liability) भी बनाता है; यह ‘फाइनेंसिंग’ है, लेकिन यह ‘राजस्व’ नहीं है। सरकार अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि ऋण लेकर अल्पकालिक ज़रूरतें पूरी करने के बजाय, राज्य के वास्तविक ‘राजस्व’ (revenue) को कैसे बढ़ाया जाए, ताकि दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। यह नीतिगत बदलाव अन्य राज्यों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है।