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‘ क्या हमें 4th पार्टी के ऑडिट की जरूरत है?’: सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता पर पीएम मोदी की सचिवों को कड़ी फटकार

नई दिल्ली: ( अभिषेक सिंह) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आयोजित ‘प्रगति’ (Pragati) की मासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सरकारी कार्यप्रणाली और सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के शीर्ष नौकरशाहों, सचिवों और मुख्य सचिवों को कड़ी फटकार लगाते हुए एक अहम सवाल पूछा, “क्या अब हमें परियोजनाओं की गुणवत्ता जांचने के लिए चौथे पक्ष (4th-Party) के ऑडिट की जरूरत है?”।

थर्ड-पार्टी ऑडिट पर उठाए सवाल :

पीएम मोदी ने निर्माण और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) में गुणवत्ता संबंधी मिल रही लगातार शिकायतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता मापने के लिए ‘थर्ड-पार्टी’ ऑडिट की व्यवस्था एक मानक प्रक्रिया है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रही है। शीर्ष अधिकारियों को चेतावनी देते हुए पीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि निर्माण की खराब गुणवत्ता “अस्वीकार्य” (Unacceptable) है और व्यवस्था इस तरह की कार्यप्रणाली के साथ नहीं चल सकती।

30,000 करोड़ रुपये की 6 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा :

इस अहम बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी छह प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गहन समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल संचयी लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, पीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति (Speed) के साथ-साथ गुणवत्ता (Quality) से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए।

बैठक के प्रमुख निर्देश :

  • बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों या पैकेजों में देखने के बजाय उन्हें एक एकीकृत (Integrated) नजरिए से मॉनिटर किया जाना चाहिए।

ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा करते हुए पीएम ने कहा कि केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ पर्याप्त ट्रांसमिशन क्षमता का होना भी आवश्यक है।

  • उन्होंने इस स्थिति की तुलना “नहरें बिछाए बिना बांध बनाने” से की, जिससे वांछित परिणाम हासिल नहीं होते।
  • मंत्रालयों, राज्यों और संबंधित एजेंसियों को निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर चरण में आधुनिक तकनीक अपनाने की आवश्यकता है। साइबर धोखाधड़ी पर भी हुई चर्चा :

इसके अलावा, बैठक में ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों की भी समीक्षा की गई। केंद्रीय गृह सचिव ने 20 राज्यों द्वारा इस दिशा में उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। पीएम मोदी ने वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं को ऐसे अपराधों से बचाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान चलाने और कर्मियों के नियमित क्षमता निर्माण (Capacity Building) पर जोर दिया।

सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी और खराब गुणवत्ता अक्सर देश के विकास को धीमा करती है। पीएम मोदी की यह तल्ख टिप्पणी इस बात का साफ संकेत है कि सरकार अब केवल परियोजनाओं को पूरा करने पर ही नहीं, बल्कि उनके विश्व स्तरीय मानकों और लंबी उम्र पर भी पूरी सख्ती के साथ फोकस कर रही है।