सरकार की मुफ्त कोचिंग योजना पर संसदीय पैनल ने उठाए सवाल: 10,500 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 2,790 नामांकन

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: देश के छात्रों के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मुफ्त कोचिंग योजना’ (free coaching scheme) के क्रियान्वयन और उसकी सफलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस सरकारी योजना के प्रदर्शन का आकलन करते हुए एक संसदीय पैनल (parliamentary panel) ने बेहद निराशाजनक आंकड़े पेश किए हैं।

संसदीय पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना में 10,500 छात्रों के नामांकन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इसके मुकाबले केवल 2,790 छात्रों का ही नामांकन (enrolled) हो पाया है। यह रिपोर्ट देश में ‘फ्री कोचिंग परिदृश्य’ (free coaching scenario) की एक बेहद निराशाजनक तस्वीर (bleak picture) उकेरती है।

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब सरकार देश के युवाओं को शैक्षिक रूप से सशक्त बनाने का दावा कर रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान देश के सभी छात्रों के लिए ‘मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग’ (free online coaching) शुरू करने की बड़ी घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री की यह घोषणा कोई सामान्य पहल नहीं थी, बल्कि यह NEET-UG पेपर लीक के मुद्दे पर जवाबदेही (accountability) की मांग कर रहे जेन ज़ी (Gen Z) के व्यापक विरोध प्रदर्शनों (protests) के बाद सामने आई थी। छात्रों के आक्रोश को शांत करने के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा था। हालांकि, संसदीय पैनल ने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है कि इस बहुप्रतीक्षित कोचिंग योजना का रोडमैप अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।