‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ ने पकड़ा जोर: कोटा सुधारों और सामान्य वर्ग के हितों का बना नया मंच

विवेक ओझा नागपुर: देश में आरक्षण नीतियों और सामाजिक न्याय के ढांचे को लेकर एक नई बहस और संगठित विरोध देखने को मिल रहा है। ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ (Reservation Hatao Andolan) के रूप में शुरू हुआ यह अभियान अब कोटा सुधारों (quota reforms) और ‘सामान्य वर्ग के हितों’ (general category interest platform) को लेकर एक बेहद मजबूत मंच के रूप में तब्दील हो चुका है।

इस आंदोलन ने अपनी मांगों को स्पष्ट और वैचारिक रूप देते हुए एक विस्तृत ‘मांग पत्र’ (charter of demands) तैयार किया है। इस आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा के लिए एक ‘राष्ट्रीय आयोग’ (National Commission for the General Category) का तत्काल गठन किया जाए।
  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘2026 जाति-समानता नियमों’ (2026 caste-equity rules) को पूरी तरह से वापस (complete rollback) लिया जाए।
  • सामाजिक समीकरणों को देखते हुए SC/ST (अत्याचार निवारण अधिनियम) यानी ‘SC/ST (Prevention of Atrocities Act)’ की विस्तृत समीक्षा (review) की जाए।

आंदोलन की ताकत और ज़मीनी प्रभाव को प्रदर्शित करने के लिए हाल ही में नागपुर शहर में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले जीरो माइल (Zero Mile) से संविधान स्क्वायर (Samvidhan Square) तक आयोजित इस ‘जन-जागरण रैली’ (Jan-Jagran Rally) में हिस्सा लिया। इस रैली ने प्रशासन और सत्ताधारी राजनीतिक दलों को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सामान्य वर्ग अब अपनी मांगों को लेकर मुखर हो रहा है।