सीमाओं की निगहबानी में बड़ा तकनीकी बदलाव: घुसपैठ और ड्रोन खतरों से निपटने के लिए केंद्र स्थापित करेगा ‘इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर’

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: भारत की सीमाओं को सुरक्षित और अभेद्य बनाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़े तकनीकी और संरचनात्मक बदलाव की ओर तेज़ी से बढ़ रही है। पारंपरिक गश्त और फेंसिंग के साथ-साथ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसी कड़ी में, केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा (border security) को बढ़ाने के लिए ‘एकीकृत कमांड सेंटर’ (integrated command centres) स्थापित करने की योजना बनाई है।
एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, यह नई ‘स्मार्ट बॉर्डर’ (smart border) वास्तुकला पूरी तरह से तकनीक-संचालित (technology-driven) होगी।
- इस आधुनिक प्रणाली में एआई (AI), सेंसर (sensors), निगरानी प्रणालियों (surveillance systems) और एकीकृत कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटरों (unified command-and-control centres) को आपस में जोड़ा जाएगा।
- इस नई व्यवस्था का एक प्रमुख फोकस उन ड्रोन्स से मिलने वाले खतरे को दूर करने पर होगा, जिनका उपयोग सीमा पार से तस्करी (smuggling) के लिए किया जाता है।
- इस महत्वाकांक्षी पहल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही पाकिस्तान सीमा (Pakistan border) से शुरू किया जाएगा।
इस तकनीकी अपग्रेड के पीछे एक व्यापक रणनीतिक विजन काम कर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के लिए एक ‘चार-सूत्रीय रणनीति’ (four-pronged border security strategy) की घोषणा की थी। इस बहुआयामी रणनीति में न केवल सीमा सुरक्षा बल शामिल हैं, बल्कि इसमें स्थानीय आबादी (local population), राज्य पुलिस (State police) और तकनीकी समाधानों (technological solutions) का भी अहम योगदान सुनिश्चित किया गया है। यह इंटीग्रेटेड मॉडल न केवल सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि दुर्गम इलाकों में मानव-रहित चौकसी को भी संभव बनाएगा।