नेपाल में बाढ़ के बाद दो नई झीलों का खतरा: कभी भी टूट सकता है बांध, 600 से ज्यादा मौतें और 2500 लोग लापता

नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं, क्योंकि आपदा के बाद बनी दो नई झीलों ने नए खतरे की घंटी बजा दी है. इनमें से एक झील से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है, जबकि दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रशासन और वैज्ञानिकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं.वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, कभी भी टूट सकता है बांधनेपाल-चीन सीमा के पास पहाड़ों में बनी इन दोनों झीलों को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. प्रसिद्ध वैज्ञानिक जेफ्री कार्गेल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि दूसरी झील में जमा पानी बेहद अस्थिर स्थिति में है और इसका बांध टूटने पर भयंकर तबाही आ सकती है. शुक्रवार को पहली झील का बांध पहले ही टूट चुका है, और अगर दूसरी झील का बांध भी टूटता है तो उसका पानी सीधे पहली झील में आ जाएगा, जिससे दोनों का पानी एक साथ भारी वेग से नीचे तटीय इलाकों की तरफ बढ़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ के दौरान बहकर आया मलबा कम से कम पांच लाख बड़े डंप ट्रकों के मलबे के बराबर था.मौतों का आंकड़ा बढ़ा, 320 भारतीय नागरिक भी शामिलइस प्राकृतिक आपदा के कारण नेपाल और तिब्बत में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 633 हो गई है, जबकि लापता लोगों की संख्या लगभग 2,500 तक पहुंच गई है. इस भयानक हादसे में लगभग 320 भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की खबर है, इसके अलावा करीब 400 भारतीय इस समय तिब्बत के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं. नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, अकेले नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई है और करीब 2,000 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में बचाव अभियान जारी है.नेपाल सरकार ने 5 जिलों को घोषित किया इमरजेंसी क्षेत्रस्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने बाढ़ और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित 5 जिलों की 15 स्थानीय निकायों (लोकल बॉडी) को आधिकारिक तौर पर आपदा प्रभावित इमरजेंसी क्षेत्र घोषित कर दिया है. सरकार का मुख्य उद्देश्य इन संवेदनशील इलाकों में राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों को तीव्र गति से आगे बढ़ाना है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री राहत कोष में अब तक भारी मदद पहुंच चुकी है, जिसमें 4.38 अरब नेपाली रुपये (लगभग 274 करोड़ भारतीय रुपये) और विभिन्न बैंकों के खातों में लाखों अमेरिकी डॉलर जमा हो चुके हैं.अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका, 80 पुल और सड़कें तबाहइस विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल की अर्थव्यवस्था को भी गंभीर चोट पहुंचाई है. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, आपदा की वजह से देश के 80 महत्वपूर्ण पुल और लगभग 40 किलोमीटर पक्की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. प्रभावित इलाका चीन की सीमा के बेहद करीब है, जहां स्थित ग्यिरोंग पोर्ट नेपाल और चीन के बीच व्यापार, पर्यटकों और वाहनों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग था, जो अब सैटेलाइट तस्वीरों में पूरी तरह तबाह नजर आ रहा है. चीन नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, ऐसे में सड़क मार्ग बाधित होने से देश के आर्थिक हितों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं.