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नेपाल हिमस्खलन के स्रोत पर बनी नई हिमनद झीलें: NDMA ने की पुष्टि, भविष्य की आपदा का मंडरा रहा गंभीर खतरा

सरिता त्रिपाठी
काठमांडू / नई दिल्ली

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान का असर हिमालयी क्षेत्रों में अब अत्यंत विनाशकारी और अप्रत्याशित रूप लेता जा रहा है। हाल ही में नेपाल में आई भयंकर आपदा के कारणों की जांच के दौरान एक बेहद गंभीर और डराने वाली भौगोलिक खोज सामने आई है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल के बर्फ-चट्टान हिमस्खलन (ice-rock avalanche) के स्रोत पर नई हिमनद झीलें (Fresh glacial lakes) बन गई हैं। यह संवेदनशील स्थिति भविष्य में किसी बड़े ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) यानी हिमनद झील फटने से आने वाली बाढ़ की एक खौफनाक चेतावनी दे रही है।

इस भौगोलिक बदलाव की गंभीरता को आधिकारिक स्तर पर भी स्वीकार कर लिया गया है। भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के प्रमुख ने इस आपदा स्थल पर दो नई झीलों और मोराइन (moraines) के बनने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह संवेदनशील क्षेत्र नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के बीच का वह सीमावर्ती इलाका है, जहाँ 28 अगस्त, 2026 को हिमनद पतन (glacial collapse) की घटना हुई थी, जिसे उपग्रह छवियों (satellite images) में भी स्पष्ट रूप से देखा गया है।

इस खोज का सबसे चिंताजनक और खतरनाक पहलू यह है कि आपदा प्रबंधन एजेंसियों के पास स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए पर्याप्त ज़मीनी डेटा नहीं है। NDMA प्रमुख ने बताया है कि इन नवगठित झीलों में पानी की मात्रा (water volume) के बारे में फिलहाल कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। पानी की मात्रा का ज्ञान न होना यह तय करना लगभग असंभव बना देता है कि कमज़ोर मोराइन बांध टूट जाने पर नीचे की घाटियों और रिहायशी इलाकों में कितना भारी विनाश हो सकता है।

प्रौद्योगिकी और संसाधनों की कमी इस प्राकृतिक चुनौती को और भी अधिक प्राणघातक बना रही है। आधिकारिक बयान के अनुसार, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में निगरानी की सीमाओं (monitoring limitations) का सीधा मतलब यह है कि हमारी प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां (early warning systems) शायद एक और ऐसी भयानक आपदा को रोकने में सक्षम न हों। यह स्थिति स्पष्ट रूप से नेपाल, भारत और चीन के बीच सीमा पार वैज्ञानिक सहयोग, उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह निगरानी और ज़मीनी स्तर पर बेहतर सेंसर नेटवर्क स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि हिमालय की तलहटी में रहने वाले लाखों लोगों के जीवन की समय रहते रक्षा की जा सके।