दवाओं के रखरखाव में घोर लापरवाही: FDA ने सिप्ला (Cipla) की पुणे C&F यूनिट का ड्रग सेल लाइसेंस किया रद्द

सरिता त्रिपाठी
पुणे
भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री दुनिया भर में अपनी क्षमता के लिए जानी जाती है, लेकिन दवाओं के निर्माण और उनके सुरक्षित रखरखाव के मानकों में ज़रा सी भी चूक लाखों मरीजों की जान जोखिम में डाल सकती है। इसी दिशा में कड़ा और सख्त संदेश देते हुए, महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration – FDA) ने देश की जानी-मानी फार्मास्युटिकल कंपनी ‘सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज’ (Cipla Pharma & Life Sciences) के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। नियामक संस्था ने पुणे स्थित सिप्ला की ‘कैरी एंड फॉरवर्डिंग’ (Carry and Forwarding – C&F) यूनिट के ड्रग सेल लाइसेंस (drug sale licences) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
यह कड़ी दंडात्मक कार्रवाई एफडीए (FDA) के अधिकारियों द्वारा यूनिट पर मारे गए एक औचक छापे और उसके बाद की गई विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर की गई है। 28 अगस्त, 2026 को सामने आई इस रिपोर्ट में नियामक ने कंपनी की इस महत्वपूर्ण वितरण इकाई में दवाओं के भंडारण और सुरक्षा प्रक्रियाओं में भारी खामियां (deficiencies) उजागर की हैं।
सबसे गंभीर उल्लंघन दवाओं के सीधे ज़मीन पर भंडारण को लेकर पाया गया। एफडीए के निरीक्षकों ने पाया कि जीवनरक्षक और सामान्य दवाइयां अनिवार्य पैलेटाइज़ेशन (palletization) के बिना सीधे फर्श (stored directly on the floor) पर रखी गई थीं। फार्मास्युटिकल गाइडलाइंस के अनुसार, दवाओं को नमी, संदूषण (contamination) और तापमान में होने वाले बदलावों से बचाने के लिए उन्हें हमेशा लकड़ी या प्लास्टिक के पैलेट्स पर और नियंत्रित तापमान में रखा जाना चाहिए। फर्श पर दवाओं का भंडारण उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता को सीधे तौर पर नष्ट कर सकता है।
इसके अलावा, एफडीए ने ‘एक्सपायर्ड दवाओं’ (expired medicines) को संभालने की प्रक्रियाओं में भी बेहद गंभीर कमियों को चिह्नित किया (flagged deficiencies) है। नियमों के मुताबिक, अवधि पार कर चुकी दवाओं को सुरक्षित रूप से अलग (Quarantine) किया जाना चाहिए ताकि वे भूलवश भी वापस सप्लाई चेन या बाज़ार में न पहुंच जाएं। लेकिन सिप्ला की इस पुणे यूनिट में इन एक्सपायर्ड दवाओं के निस्तारण और उनके रिकॉर्ड-कीपिंग में भारी लापरवाही बरती जा रही थी।
पुणे सीएंडएफ (C&F) यूनिट पूरे पश्चिमी महाराष्ट्र में सिप्ला की दवाओं के वितरण का एक बहुत बड़ा केंद्र है। इसका लाइसेंस रद्द होने से न केवल कंपनी की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी, बल्कि बाज़ार में दवाओं की अस्थायी कमी भी हो सकती है। हालांकि, एफडीए के इस सख्त कदम ने पूरी फार्मा इंडस्ट्री को यह स्पष्ट चेतावनी दे दी है कि कॉर्पोरेट ब्रांड का नाम कितना भी बड़ा क्यों न हो, जनस्वास्थ्य और गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) के मानकों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।