CJP और आम आदमी पार्टी का बढ़ता गठजोड़: हर कदम पर साथ निभाने वाले ‘सदाबहार दोस्त’ की भूमिका में AAP

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की राजनीति और सामाजिक आंदोलनों के परिदृश्य में इन दिनों एक बेहद दिलचस्प और मजबूत गठजोड़ देखने को मिल रहा है। एक नए समाचार विश्लेषण से यह स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आया है कि ‘सीजेपी’ (CJP) को आम आदमी पार्टी (AAP) के रूप में एक ऐसा ‘सदाबहार दोस्त’ (all-weather friend) मिल गया है, जो हर मोड़ पर उसका समर्थन कर रहा है। यह राजनीतिक और सामाजिक तालमेल दिल्ली के वर्तमान घटनाक्रमों में एक नया अध्याय लिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों और ज़मीनी रिपोर्टों के अनुसार, सीजेपी (CJP) की शुरुआत से ही आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा है। इस बात की पुष्टि इस तथ्य से होती है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal), पार्टी के अन्य शीर्ष नेता और पूरा का पूरा ‘आप इकोसिस्टम’ (AAP ecosystem) शुरुआत से ही सीजेपी का पुरज़ोर समर्थन करता आ रहा है। सबसे अहम बात यह है कि आम आदमी पार्टी का यह समर्थन तब से जारी है, जब यह आंदोलन दिल्ली में एक ‘जन आंदोलन’ (mass movement) के रूप में पूरी तरह से स्थापित भी नहीं हुआ था। यह दर्शाता है कि आम आदमी पार्टी इस संगठन के वैचारिक आधार और इसके युवा नेतृत्व में असीम संभावनाएं देखती है।
इस बढ़ती नज़दीकी का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष प्रमाण नई दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर देखने को मिला। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत डिपके (CJP Founder Abhijeet Dipke) ने सीजेपी के ‘चलो संसद’ (Chalo Sansad) मार्च के बाद जंतर-मंतर पर युवाओं को संबोधित किया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम और मार्च के दौरान आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल स्वयं वहां उपस्थित थे। एक स्थापित मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय पार्टी के संयोजक का इस तरह एक युवा आंदोलन के मंच पर पहुंचना, दोनों संगठनों के बीच की वैचारिक और रणनीतिक साझेदारी को पुख्ता करता है। जंतर-मंतर, जो कि ऐतिहासिक रूप से देश के कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है (जिसमें स्वयं आम आदमी पार्टी का उद्भव भी शामिल है), पर यह साझा उपस्थिति एक कड़ा राजनीतिक संदेश देती है।
हालांकि, इस जन आंदोलन की राह इतनी आसान नहीं रही है और इसे ज़मीनी स्तर पर कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। हालिया रिपोर्टों में इस बात का भी ज़िक्र किया गया है कि जांच-पड़ताल के दौरान स्वयंसेवकों पर हमले (volunteers being attacked while checking) किए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। आंदोलनों के दौरान स्वयंसेवकों पर इस तरह के हमले प्रशासन और कानून-व्यवस्था के समक्ष एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं। इसके बावजूद, आम आदमी पार्टी के पूर्ण समर्थन ने इस आंदोलन को एक ऐसी राजनीतिक ढाल प्रदान की है, जो इसे दबावों के बीच भी मज़बूती से खड़े रहने में मदद कर रही है। आने वाले समय में यह देखना अत्यंत रोचक होगा कि जंतर-मंतर से उठी यह युवा आवाज़ और आम आदमी पार्टी का यह ‘सदाबहार’ राजनीतिक गठजोड़ राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति की दिशा को किस प्रकार से प्रभावित करता है।