तमिलनाडु कैबिनेट में भारी दरार: ‘राहुल गांधी को पीएम उम्मीदवार नहीं माना तो छोड़ देंगे विजय की कैबिनेट’ – कांग्रेस की खुली चेतावनी

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
नागरकोइल / चेन्नई
तमिलनाडु की गठबंधन राजनीति में इन दिनों एक भूचाल सा आ गया है, जिसने राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। राज्य सरकार में शामिल प्रमुख सहयोगी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विजय (CM Vijay) के नेतृत्व वाली कैबिनेट से बाहर होने की एक बेहद कड़ी और खुली चेतावनी दे दी है। तमिलनाडु के पर्यटन मंत्री एस. राजेश कुमार (Tamil Nadu Tourism Minister S. Rajesh Kumar) ने स्पष्ट रूप से ऐलान किया है कि यदि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार (PM candidate) के रूप में स्वीकार नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी विजय कैबिनेट (Vijay Cabinet) से इस्तीफा दे देगी।
इस अभूतपूर्व राजनीतिक तल्खी की जड़ें गठबंधन के भीतर चल रही क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं के टकराव में छिपी हैं। पर्यटन मंत्री एस. राजेश कुमार की यह सख्त चेतावनी एक विशेष राजनीतिक पृष्ठभूमि (backdrop) में सामने आई है। दरअसल, हाल के दिनों में टीवीके (TVK) पार्टी के कुछ मंत्रियों और पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री विजय को खुले तौर पर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार (Prime Minister candidate) के रूप में पेश करने की मांग शुरू कर दी है। 31 अगस्त, 2026 को नागरकोइल (Nagercoil) से प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय दल की इस महत्वाकांक्षा ने राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को पूरी तरह से असहज कर दिया है।
कांग्रेस के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी अपने सर्वोच्च नेता राहुल गांधी को विपक्ष के मुख्य चेहरे और प्रधानमंत्री पद के निर्विवाद विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में गठबंधन के ही एक सहयोगी दल द्वारा अपने मुख्यमंत्री को पीएम उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करना (projecting Mr. Vijay as Prime), कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति के लिए एक सीधा झटका है। कांग्रेस के मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि टीवीके इसी नैरेटिव (narrative) को आगे बढ़ाना जारी रखती है, तो विजय के नेतृत्व वाली कैबिनेट (Vijay-led Cabinet) में उनका बने रहना असंभव हो जाएगा।
यह टकराव भारतीय राजनीति में उस क्लासिक दुविधा को दर्शाता है जहां क्षेत्रीय क्षत्रप अपने राज्य में मिली अपार लोकप्रियता के बल पर राष्ट्रीय पटल पर अपनी दावेदारी पेश करना चाहते हैं, जबकि राष्ट्रीय दल उन्हें एक राज्य तक सीमित रखना चाहते हैं। तमिलनाडु में विजय की अपार जनसमर्थन वाली छवि ने उनकी पार्टी (TVK) के कार्यकर्ताओं में यह उत्साह भर दिया है कि वे देश का नेतृत्व कर सकते हैं। लेकिन गठबंधन धर्म की अपनी सीमाएं होती हैं। यदि टीवीके अपने रुख पर कायम रहती है और कांग्रेस सचमुच विजय कैबिनेट से बाहर हो जाती है, तो इसका सीधा असर न केवल तमिलनाडु की वर्तमान सरकार की स्थिरता पर पड़ेगा, बल्कि आगामी आम चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्तर पर बन रहे विपक्षी मोर्चे की एकजुटता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा।