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बेंगलुरु में 300 किलोमीटर फुटपाथ पर कब्ज़ा: मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा का कड़ा एक्शन, आउटसोर्स कर्मचारियों को बर्खास्तगी की चेतावनी

सरिता त्रिपाठी
बेंगलुरु

तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और अनियोजित विकास के कारण बेंगलुरु शहर की एक बड़ी समस्या इसके फुटपाथों का गायब होना है। राहगीरों के चलने के लिए बनाए गए पैदल मार्गों पर अवैध कब्ज़े की समस्या ने अब एक विकराल रूप ले लिया है, जिस पर राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शहर के बुनियादी ढांचे को सुधारने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए, ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट मंत्री (Greater Bengaluru Development Minister) कृष्णा बायरे गौड़ा (Krishna Byre Gowda) ने 29 अगस्त, 2026 को शहर में 300 किलोमीटर लंबे फुटपाथों पर अतिक्रमण (300 km of footpath encroachments) बरकरार रहने पर अधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई (disciplinary action) की कड़ी चेतावनी दी है।

बेंगलुरु जैसे महानगर में, जहां लाखों लोग रोज़ाना पैदल सफर करते हैं, 300 किलोमीटर लंबे फुटपाथ का अतिक्रमण कोई छोटी बात नहीं है। यह न केवल राहगीरों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर कर उनकी जान जोखिम में डालता है, बल्कि शहर के ट्रैफिक जाम को भी कई गुना बढ़ा देता है। फुटपाथों पर दुकानों, रेहड़ी-पटरियों, और पार्किंग के अवैध कब्ज़े से निपटने में नागरिक एजेंसियों की विफलता से नाराज़ होकर, शनिवार (Saturday) को मंत्री ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई।

इस समस्या की जड़ में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही को मानते हुए, कृष्णा बायरे गौड़ा ने अपनी चेतावनी को केवल नियमित अधिकारियों तक ही सीमित नहीं रखा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि इस कार्य में लगे आउटसोर्स कर्मचारियों (outsourced personnel) को भी बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने कहा कि यदि अतिक्रमण हटाने के काम में कोई भी आउटसोर्स कर्मचारी लापरवाह (negligent) पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया जाएगा (removed from service)।

यह सख्त निर्देश इस बात को उजागर करता है कि सरकार अब ‘जीरो टॉलरेंस’ (zero tolerance) की नीति पर काम कर रही है। अक्सर देखा गया है कि ठेके पर रखे गए कर्मचारी स्थानीय वेंडरों के साथ मिलीभगत कर अतिक्रमण को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। सेवा से बर्खास्तगी की यह सीधी धमकी इसी नेक्सस (nexus) को तोड़ने का एक प्रयास है। बेंगलुरु को एक विश्व स्तरीय ‘ग्लोबल सिटी’ बनाने के लिए उसके नागरिक बुनियादी ढांचे का सुचारू होना अत्यंत आवश्यक है। राहगीरों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए मंत्री का यह कदम सराहनीय है, लेकिन अब यह देखना बाकी है कि नगर निगम (BBMP) के अधिकारी इस 300 किलोमीटर के भारी-भरकम अतिक्रमण को साफ करने के लिए ज़मीन पर कितनी तेज़ी और ईमानदारी से काम करते हैं।