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नेपाल-चीन बाढ़ त्रासदी पर संयुक्त राष्ट्र की गंभीर चेतावनी: हिंदू कुश हिमालय की ‘पारिस्थितिक नाजुकता’ पूरी दुनिया के लिए है बड़ा खतरा

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
नई दिल्ली / संयुक्त राष्ट्र

नेपाल और चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में आई हालिया विनाशकारी बाढ़ ने न केवल भारी मानवीय क्षति पहुंचाई है, बल्कि इसने वैश्विक जलवायु परिवर्तन के सबसे खतरनाक और प्रत्यक्ष परिणामों को भी दुनिया के सामने ला खड़ा किया है। संयुक्त राष्ट्र (U.N.) के शीर्ष जलवायु प्रमुख ने इस त्रासदी पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक बहुत बड़ा ‘अलार्म’ करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु प्रमुख साइमन स्टिल (Simon Stiell) ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नेपाल-चीन फ्लैश फ्लड आपदा ने ‘हिंदू कुश हिमालय’ (Hindu Kush Himalayas) क्षेत्र की घोर पारिस्थितिक नाजुकता (Fragility) को पूरी तरह से उजागर कर दिया है।

नेपाल में अचानक आई इस बाढ़ से मरने वालों की संख्या 788 तक पहुंच गई है, और बचाव दलों द्वारा मलबे से लगातार और भी शव निकाले जा रहे हैं। 2,500 से अधिक लोगों के अभी भी लापता होने की खबर है। इस भारी तबाही के पीछे के कारणों का विश्लेषण करते हुए साइमन स्टिल ने बताया कि हिंदू कुश हिमालय, जिसे दुनिया का ‘तीसरा ध्रुव’ (Third Pole) भी कहा जाता है, वैश्विक तापमान वृद्धि (Global Warming) का सबसे बड़ा शिकार बन रहा है। इस क्षेत्र के ग्लेशियर रिकॉर्ड गति से पिघल रहे हैं, जिसके कारण हिमालयी नदियों में पानी का स्तर अचानक और अनियंत्रित रूप से बढ़ जाता है।

जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में हो रहे अंधाधुंध और अनियोजित निर्माण कार्यों, वनों की कटाई और कार्बन उत्सर्जन ने इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक ‘टिकिंग टाइम बम’ में तब्दील कर दिया है। जब अत्यधिक बारिश या बादल फटने की घटनाएं तेज़ी से पिघलते ग्लेशियरों के साथ मिलती हैं, तो वह इस तरह की विनाशकारी अचानक बाढ़ (Flash Floods) का रूप ले लेती हैं, जो अपने रास्ते में आने वाले पूरे के पूरे गांवों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को तिनके की तरह बहा ले जाती हैं।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु प्रमुख का यह बयान एक सख्त चेतावनी है कि यदि कार्बन उत्सर्जन पर तत्काल और प्रभावी वैश्विक लगाम नहीं कसी गई, तो भारत, नेपाल, चीन और पाकिस्तान सहित इस पूरे क्षेत्र में रहने वाले करोड़ों लोगों का जीवन सीधे तौर पर संकट में पड़ जाएगा। हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र एशिया की प्रमुख नदियों का स्रोत है, जिन पर कृषि और आजीविका निर्भर है। इन ग्लेशियरों के अस्थिर होने का अर्थ केवल बाढ़ नहीं है, बल्कि भविष्य में एक भयंकर जल संकट का भी अंदेशा है। साइमन स्टिल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे विकासशील और पर्वतीय देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और अपने बुनियादी ढांचे को ‘क्लाइमेट-रेज़िलिएंट’ (जलवायु-लचीला) बनाने के लिए तत्काल वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करें। यह आपदा महज़ एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि वैश्विक जलवायु आपातकाल का एक स्पष्ट प्रमाण है।