“आतंकवाद पर दोहरे मापदंड किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं”: SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की सख्त चेतावनी, कहा- आतंकी इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए एकजुट हो दुनिया

सरिता त्रिपाठी बिश्केक / नई दिल्ली
वैश्विक पटल पर आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख हमेशा से बेहद सख्त और शून्य-सहिष्णुता (Zero-Tolerance) वाला रहा है। इसी कड़े रुख को एक बार फिर दुनिया के सबसे शक्तिशाली मंचों में से एक पर पूरी आक्रामकता के साथ दोहराया गया है। 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद और उसे पालने-पोसने वाले देशों पर सीधा और करारा प्रहार किया है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे दिग्गज विश्व नेताओं की मौजूदगी में, प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में आह्वान किया कि पूरे SCO को ‘आतंकी इकोसिस्टम’ (Terror Ecosystem) को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी एकजुटता (unitedly) के साथ काम करना चाहिए। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “हमें एक स्वर में यह कहना होगा कि आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों (Double standards) के लिए कोई जगह नहीं हो सकती है।”
उनका यह बयान भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘दोहरे मापदंड’ शब्द का प्रयोग सीधे तौर पर उन देशों (विशेषकर पाकिस्तान और कुछ हद4 तक चीन के उस रवैये) की ओर इशारा करता है, जो ‘अच्छे आतंकवाद’ और ‘बुरे आतंकवाद’ के बीच फर्क करते हैं, या संयुक्त राष्ट्र में घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकियों को बचाने के लिए अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हैं। SCO एक ऐसा संगठन है जिसमें भारत, रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ-साथ पाकिस्तान भी शामिल है। ऐसे में उसी मंच से आतंकवाद के पनाहगारों को चेतावनी देना भारत की कूटनीतिक आक्रामकता और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
शिखर सम्मेलन के दौरान एक बेहद अहम और प्रतीकात्मक तस्वीर भी सामने आई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ गर्मजोशी से मिलते और बातचीत करते नज़र आए। यह तस्वीर भारत की उस अद्वितीय ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) को प्रमाणित करती है, जिसके तहत भारत अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ घनिष्ठ संबंध रखने के बावजूद, यूरेशियन शक्तियों (Eurasia) के साथ भी एक मज़बूत और स्वतंत्र संवाद स्थापित करने में सक्षम है।
SCO का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद से निपटना (विशेषकर इसके RATS – क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना के माध्यम से) है। भारत की चिंता सीमा पार आतंकवाद और अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र से पनपने वाले उग्रवाद को लेकर हमेशा से रही है। पीएम मोदी का यह संबोधन इस बात का स्पष्ट आह्वान है कि आर्थिक प्रगति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तभी संभव है जब पूरा यूरेशिया आतंकवाद के साये से मुक्त हो। भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में वह किसी भी कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।