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बिहार की सियासत में मानहानि पर संग्राम: मंत्री संजय सिंह पर लगे आरोपों पर चिराग पासवान हुए सख्त, ‘दोषी पाए जाने पर होगी पार्टी से छुट्टी’

द इंडियन व्यू टीम पटना

बिहार की राजनीति हमेशा से अपने तीखे बयानों, आरोप-प्रत्यारोपों और अचानक होने वाले गठबंधनों व टूट-फूट के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार राज्य की सियासत में एक ‘हिट-एंड-रन’ (Hit-and-Run) राजनीति के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कानूनी व अनुशासनात्मक लड़ाई छिड़ गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कद्दावर नेता चिराग पासवान ने अपनी ही पार्टी के विधायक और बिहार सरकार में मंत्री संजय सिंह को लेकर एक बेहद कड़ा और सैद्धांतिक स्टैंड लिया है, जिसने पूरे राज्य के सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने संजय सिंह पर कुछ बेहद गंभीर और अपमानजनक आरोप लगाए। इन आधारहीन आरोपों को राजनीति का सामान्य हिस्सा मानकर चुप बैठने के बजाय, मंत्री संजय सिंह ने एक आक्रामक कानूनी रास्ता अपनाया है। उन्होंने तेज प्रताप यादव को एक सख्त कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजा है, जिसमें उन्होंने इन ‘झूठे और मानहानिकारक’ (false and defamatory) आरोपों के लिए बिना शर्त सार्वजनिक माफी (unconditional apology) मांगने की मांग की है। इतना ही नहीं, संजय सिंह ने अपनी प्रतिष्ठा को पहुंची ठेस के एवज़ में ₹50 करोड़ रुपये के भारी-भरकम हर्जाने (₹50 crore in damages) का भी दावा ठोका है।

इस पूरे राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक परिपक्व और ज़िम्मेदार नेता की तरह बयान दिया है। चिराग पासवान ने स्पष्ट कर दिया है कि राजनीति में सार्वजनिक जीवन की शुचिता सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि “यदि संजय सिंह पर लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो उन्हें पार्टी से तुरंत निष्कासित (expelled from party) कर दिया जाएगा।” हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी संदेश दिया कि उनकी पार्टी किसी भी विपक्षी नेता को महज़ सस्ती लोकप्रियता के लिए उनके नेताओं की छवि धूमिल करने की छूट नहीं देगी।

चिराग पासवान का यह बयान उनकी ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है। एक तरफ वह अपनी ही पार्टी के मंत्री पर आरोप सिद्ध होने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हट रहे हैं, तो दूसरी तरफ वह संजय सिंह द्वारा उठाए गए 50 करोड़ के मानहानि के कदम का मौन समर्थन भी कर रहे हैं, जो विपक्षी नेताओं को बिना सबूत बयानबाज़ी करने से पहले दस बार सोचने पर मजबूर करेगा।

बिहार में आगामी राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यह कानूनी लड़ाई और बयानबाज़ी काफी अहम है। अक्सर राजनेता एक-दूसरे पर कीचड़ उछालकर मीडिया की सुर्खियां बटोरते हैं और फिर मामले को भुला दिया जाता है। लेकिन 50 करोड़ रुपये के मानहानि के इस नोटिस ने बिहार की राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप यादव इस कानूनी नोटिस का क्या जवाब देते हैं और क्या वे अपने दावों को अदालत में साबित करने का जोखिम उठाएंगे, या फिर बिना शर्त माफी मांगकर इस विवाद को यहीं खत्म कर देंगे। यह पूरा प्रकरण बिहार में राजनीतिक जवाबदेही का एक नया और कड़ा मानक स्थापित कर रहा है।