मध्य एशिया के अहम कूटनीतिक दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी: ताशकंद की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के बाद बिश्केक में 26वें SCO शिखर सम्मेलन में करेंगे शिरकत

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली / ताशकंद
भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के साथ-साथ अब ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति भी वैश्विक कूटनीति के पटल पर अपने अहम परिणाम दिखा रही है। मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के उद्देश्य से, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बेहद महत्वपूर्ण विदेशी दौरे पर रवाना हो गए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले ताशकंद की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के साथ अपनी मध्य एशिया यात्रा की शुरुआत कर दी है। यह दौरा भारत के यूरेशियन कूटनीतिक दृष्टिकोण के लिहाज़ से एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
ताशकंद (उज्बेकिस्तान) में प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय प्रवास कई मायनों में ऐतिहासिक है। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझीदार है, जिसके साथ रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। विशेष रूप से अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा को देखते हुए ताशकंद और नई दिल्ली के बीच उच्च स्तरीय खुफिया साझाकरण और आतंकवाद विरोधी तंत्र को मजबूत करने पर गंभीर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशिया तक भारत की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी ज़ोर दिया जाएगा।
ताशकंद में अपनी द्विपक्षीय कूटनीतिक व्यस्तताओं को सफलतापूर्वक संपन्न करने के बाद, प्रधानमंत्री अपने दौरे के दूसरे और सबसे अहम चरण के लिए प्रस्थान करेंगे। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, श्री मोदी ताशकंद से बिश्केक की यात्रा करेंगे ताकि वे 26वें एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग ले सकें। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाला यह 26वां शिखर सम्मेलन वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अत्यधिक महत्व रखता है। इस सम्मेलन में रूस, चीन, पाकिस्तान और मध्य एशियाई गणराज्यों के शीर्ष नेता एक ही मंच पर मौजूद होंगे, जो इसे कूटनीतिक शक्ति-प्रदर्शन का एक बड़ा अखाड़ा बनाता है।
बिश्केक में आयोजित होने वाले इस SCO शिखर सम्मेलन में भारत का मुख्य एजेंडा सीमा पार आतंकवाद पर अंकुश लगाना, क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply chains) को सुदृढ़ करना और बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना रहेगा। भारत हमेशा से यह स्पष्ट करता आया है कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ SCO के मंच से एक साझा और सख्त आवाज़ उठनी चाहिए। इसके साथ ही, भारत ‘स्टार्टअप्स और इनोवेशन’ के क्षेत्र में अपने सफल मॉडलों को मध्य एशियाई देशों के साथ साझा करने की पेशकश भी कर सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा एक बहुत ही सधी हुई कूटनीतिक चाल है। जहां एक ओर भारत अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्य एशिया और यूरेशियन शक्तियों के साथ भी अपने संबंधों को उसी गर्मजोशी के साथ संतुलित कर रहा है। ताशकंद में द्विपक्षीय मज़बूती और बिश्केक में बहुपक्षीय भागीदारी भारत की इसी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) का सटीक उदाहरण है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री की अन्य वैश्विक नेताओं के साथ होने वाली ‘साइडलाइन बैठकों’ (Sideline meetings) पर भी दुनिया भर के मीडिया और थिंक-टैंक की पैनी नज़र रहेगी, क्योंकि यहीं से क्षेत्रीय भू-राजनीति के भविष्य के कई अहम संकेत मिलेंगे।