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तीन दशकों का इंतज़ार हुआ खत्म: चंद्रबाबू नायडू 31 अगस्त को करेंगे 4 लाख लोगों की प्यास बुझाने वाले ‘वेलिगोंडा सिंचाई परियोजना’ का उद्घाटन

विवेक ओझा
अमरावती / मार्कापुरम

आंध्र प्रदेश के सूखाग्रस्त और पानी की भारी किल्लत झेलने वाले क्षेत्रों के लिए 31 अगस्त का दिन एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अवसर लेकर आ रहा है। पूरे तीन दशकों (Three decades) के लंबे इंतज़ार, प्रशासनिक अड़चनों और तकनीकी चुनौतियों के बाद आखिरकार ‘पूला सुब्बैया वेलिगोंडा सिंचाई परियोजना’ (Poola Subbaiah Veligonda irrigation project) का पहला चरण बनकर तैयार हो गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) 31 अगस्त को मार्कापुरम जिले में इस बहुप्रतीक्षित मेगा प्रोजेक्ट के पहले चरण का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना इस पूरे क्षेत्र की कृषि और अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है।

इस परियोजना की आधारशिला रखे जाने के बाद से ही इस क्षेत्र के किसानों और आम निवासियों ने इसके पूरा होने का एक लंबा और थका देने वाला इंतज़ार किया है। यह महज़ एक सिंचाई परियोजना नहीं है, बल्कि यह फ्लोराइड युक्त पानी और सूखे की मार झेल रहे प्रकाशम, नेल्लोर और कडप्पा जिलों के लाखों लोगों के लिए जीवनदायिनी संजीवनी है। इस परियोजना के तकनीकी और परिचालन विवरणों के अनुसार, श्रीशैलम जलाशय (Srisailam reservoir) से सीधे तौर पर 10.70 टीएमसी फीट (tmc ft) कृष्णा नदी का पानी (Krishna water) नल्लामाला सागर (Nallamala Sagar) में छोड़ा जाएगा।

इस विशाल जलराशि के नल्लामाला सागर में पहुंचने से इस पूरे क्षेत्र के जल स्तर में अभूतपूर्व सुधार होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस परियोजना के पहले चरण के चालू होने से लगभग 1.19 लाख एकड़ (1.19 lakh acres) सूखी और बंजर कृषि भूमि को सीधे तौर पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ ही, इस परियोजना का सबसे बड़ा मानवीय पहलू यह है कि यह क्षेत्र के लगभग 4 लाख लोगों (4 lakh people) को स्वच्छ और सुरक्षित पीने का पानी (drinking water) प्रदान करेगी।

नल्लामाला की पहाड़ियों के बीच से टनल (सुरंग) खोदकर कृष्णा नदी के पानी को सूखाग्रस्त इलाकों तक लाना इंजीनियरिंग की एक बहुत बड़ी और जटिल उपलब्धि है। कई वर्षों तक इस परियोजना का काम बजट की कमी, पर्यावरण मंज़ूरियों और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में धीमा रहा। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के लिए इस परियोजना का उद्घाटन करना एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक सफलता है, क्योंकि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इस परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का वादा किया था। मार्कापुरम जिले के किसानों के लिए श्रीशैलम का पानी उनके खेतों तक पहुंचना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस परियोजना से न केवल फसल उत्पादन में भारी वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र से किसानों के पलायन पर भी रोक लगेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी।