दिल्ली-एनसीआर में बारिश के बीच दरिंदगी: लिफ्ट देने के बहाने चलती बस में 17 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म, ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली
देश की राजधानी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बेहद गंभीर और विचलित करने वाले सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में भारी बारिश के बीच मदद की आस लगाए एक नाबालिग लड़की के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नोएडा से दिल्ली की यात्रा (Noida-Delhi journey) के दौरान एक चलती बस के अंदर एक नाबालिग लड़की (Minor girl) के साथ सामूहिक दुष्कर्म (gang-raped) की खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया है। यह घटना उस समय हुई जब भारी बारिश के बीच (amid heavy rain) फंसी हुई इस 17 वर्षीय किशोरी को मदद के नाम पर लिफ्ट (offered lift) दी गई थी।
इस अमानवीय कृत्य ने यह साबित कर दिया है कि आपातकालीन स्थिति में भी सार्वजनिक परिवहन से जुड़े कर्मचारियों पर भरोसा करना कितना घातक साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की रहने वाली 17 वर्षीय इस किशोरी (17-year-old girl) ने भारी बारिश में फंसे होने के कारण मदद मांगते हुए इस स्लीपर बस में प्रवेश किया था। आश्रय और सुरक्षा की उम्मीद में बस में सवार हुई इस नाबालिग को अंदाज़ा भी नहीं था कि यह सफर उसके लिए एक भयानक दुःस्वप्न में बदल जाएगा। बस के भीतर मौजूद ड्राइवर और कंडक्टर द्वारा कथित तौर पर इस घिनौने सामूहिक दुष्कर्म (allegedly gang raped by a bus driver and conductor) को अंजाम दिया गया।
अपराध को अंजाम देने के बाद, इन दरिंदों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए पीड़ित लड़की को कश्मीरी गेट आईएसबीटी (Kashmere Gate ISBT) के पास बेसहारा छोड़ दिया (allegedly abandoned)। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इस मामले की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की है। कश्मीरी गेट के पास लड़की को छोड़े जाने के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों मुख्य आरोपियों—बस के ड्राइवर और कंडक्टर—को गिरफ्तार (driver and conductor were arrested) कर लिया है। पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई दर्शाती है कि ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियां ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति अपना रही हैं।
सबूतों को सुरक्षित रखने और मामले की गहन जांच के लिए पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किए गए वाहन को अपने कब्ज़े में ले लिया है। पुलिस द्वारा इस स्लीपर बस को ज़ब्त कर लिया गया है और इसे फोरेंसिक जांच (sent for forensic examination) के लिए भेज दिया गया है। घटनास्थल की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि नीले रंग की इस बस, जिसके सामने के शीशे पर ‘VISHWANATH’ (विश्वनाथ) लिखा हुआ है, को तिमारपुर पुलिस स्टेशन के पास खड़ा (parked near Timarpur Police station) किया गया है। फोरेंसिक टीम बस के भीतर से जैविक साक्ष्य, फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक सबूत इकट्ठा कर रही है ताकि अदालत में आरोपियों के खिलाफ एक अभेद्य मामला प्रस्तुत किया जा सके।
यह घटना महिला सुरक्षा को लेकर किए जा रहे तमाम दावों की पोल खोलती है। राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा जैसे हाई-टेक शहरों के बीच सफर करते समय एक निहत्थी और बारिश में फंसी किशोरी का इस तरह से शिकार होना समाज के सामूहिक पतन का संकेत है। अब देखना यह है कि फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया कितनी तेज़ी से आगे बढ़ती है और पीड़िता को कितनी जल्दी न्याय मिल पाता है।