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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का विरोध, प्रदर्शनकारियों ने दिखाए काले झंडे

पटना ( सरिता त्रिपाठी ) : तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा को मंगलवार को नदिया जिले के छपरा में एक कार्यक्रम में विरोध का सामना करना पड़ा. पलाशीपारा से टीएमसी के वर्तमान विधायक रुकबानुर रहमान भी पार्टी के कार्यक्रम में मौजूद थे।

इससे एक दिन पहले ही मोइत्रा ने टीएमसी सदस्यों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। विरोध की घटना पर महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी के सामने लेटकर सड़क रोकने की कोशिश की, काले झंडे लहराए, उन्हें चोर कहकर नारे लगाए और उनकी कार पर मुक्का भी मारा।

मीटिंग के बाद मोइत्रा ने कहा, “आज छपरा में बुलाई गई कार्यकर्ताओं की बैठक सफल रही. तृणमूल के पुराने सदस्य इसके लिए एकजुट हुए हैं. छपरा के पूर्व विधायक रुकबानुर रहमान भी यहां मौजूद हैं। ” प्रदर्शनकारियों के बारे में मोइत्रा ने कहा, “मैंने सुना है कि ये लोग जेबर शेख (Jeber Sheikh) के गुट के हैं. असल में, जेबर को ही काले झंडे दिखाए जाने चाहिए. आखिर, छपरा में बीजेपी की कोई मौजूदगी नहीं है. जेबर ने वहां तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीता था. फिर भी, उन्होंने पार्टी को धोखा दिया, ममता बनर्जी को छोड़ दिया और BJP की बी-टीम में शामिल हो गए. इस धोखेबाज को काले झंडे दिखाना ज्यादा सही होता.”

उन्होंने कहा, “और अगर उन्हें लगता है कि मुझे काले झंडे दिखाकर उन्हें कुछ मीडिया कवरेज मिल जाएगी, तो इससे उन्हें कुछ हासिल होने वाला नहीं है.”

इससे पहले, मोइत्रा ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका देकर आरोप लगाया था कि उनके अपने चुनाव क्षेत्र में BJP कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बार-बार हमलों के कारण वह अपनी ड्यूटी नहीं कर पा रही हैं और उन्होंने अतिरिक्त सिक्योरिटी कवर की मांग की थी। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मोइत्रा की सुरक्षा के लिए उनकी मौजूदा निजी सुरक्षा के अलावा दो और पुलिसवाले तैनात किए जाएं।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कृष्णानगर के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया कि अगले 30 दिनों में जब भी वह अपने लोकसभा क्षेत्र का दौरा करेंगी, तो यह सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। लेकिन, कोर्ट ने कहा कि मोइत्रा को उनके चुनाव क्षेत्र में जाने से 48 घंटे पहले SP को ईमेल से बताना होगा. यह अंतरिम आदेश 1 अक्टूबर तक लागू रहेगा, जब मामले की अगली सुनवाई होनी है. पुलिस को उस तारीख को कोर्ट में रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है।