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खुली सीमाएं, नए खतरे: SSB ने नेपाल, भूटान बॉर्डर पर निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया

नई दिल्ली ( विवेक ओझा ) : नेपाल और भूटान के साथ भारत की 2,450 किमी लंबी खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा करना एक बेहद जटिल सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है. इससे निपटने और नए जमाने के खतरों का सामना करने के लिए सशस्त्र सीमा बल (SSB) फेशियल रिकग्निशन, रडार, सीसीटीवी सिस्टम, ड्रोन और अन्य आधुनिक निगरानी तकनीकों का सहारा ले रहा है।

यह मुद्दा मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एसएसबी अलंकरण समारोह में प्रमुखता से छाया रहा, जहां केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बड़े पैमाने पर वैध आवाजाही को सुगम बनाने के साथ-साथ देश की मित्रवत और खुली सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए एक “संतुलित दृष्टिकोण” की आवश्यकता पर जोर दिया

मोहन ने कहा कि सीमा सुरक्षा भारत की आंतरिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार है. उन्होंने नेपाल और भूटान के साथ खुली सीमाओं को सुरक्षित करने में एसएसबी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “इन सीमाओं के पार बड़े पैमाने पर वैध आवाजाही के बीच सुरक्षा, जन सुविधा और मैत्रीपूर्ण संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना एसएसबी की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इन सीमाओं के खुले होने के कारण पारंपरिक सीमा प्रबंधन विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है, क्योंकि आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कोई नियमित बाड़ नहीं हैं. गृह सचिव ने चेहरा पहचानने वाली प्रणाली, रडार, सीसीटीवी कैमरों और अन्य तकनीकी उपकरणों के जरिये निगरानी को मजबूत करने के एसएसबी के प्रयासों की सराहना की।

केंद्रीय गृह सचिव ने मानव तस्करी, जाली मुद्रा, मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के खिलाफ एसएसबी की कार्रवाई पर भी प्रकाश डाला – ये ऐसी गतिविधियां हैं जो भारत की खुली सीमाओं पर महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा करती हैं.

गृह मंत्रालय द्वारा परिकल्पित एक चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा ढांचे का उल्लेख करते हुए, मोहन ने कहा कि सीमा सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों, केंद्र सरकार की एजेंसियों और सीमावर्ती समुदायों के बीच मजबूत समन्वय से सीमा प्रबंधन को और अधिक मजबूती मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर इस ढांचे को लागू करने के उद्देश्य से पहली बड़ी बैठक भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में एसएसबी की देखरेख में आयोजित की गई थी.

SSB के महानिदेशक संजय सिंघल ने कहा कि नेपाल और भूटान के साथ 2,450 किमी लंबी खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित रखना बल की सबसे संवेदनशील जिम्मेदारियों में से एक है, विशेष रूप से इन दोनों सीमाओं पर होने वाली बड़े पैमाने पर वैध आवाजाही के कारण. उन्होंने कहा कि SSB के जवान मादक पदार्थों, हथियारों, नकली मुद्रा, मानव तस्करी, अवैध अप्रवासन और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।

हालांकि, सिंघल ने कहा कि सीमाओं पर सुरक्षा परिवेश तेजी से बदल रहा है. सिंघल ने कहा कि हाइब्रिड युद्ध, साइबर और सूचना युद्ध, ड्रोन-आधारित खतरे और तस्करी के बदलते तरीके सीमा प्रबंधन के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं. इन खतरों से निपटने के लिए, SSB आधुनिक निगरानी प्रणालियों, बेहतर संचार उपकरणों, ड्रोन और अन्य तकनीकी समाधानों के जरिये अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।

SSB की भूमिका पारंपरिक सीमा सुरक्षा से आगे तक विस्तारित हो गई है. इसके कर्मियों को आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों, वामपंथी उग्रवाद, चुनावी कर्तव्यों, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए तैनात किया जाता है। SSB ने हाल ही में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान भी चलाया।