सचिन के साथ शुरू हुआ सफर, एक गलती ने खत्म कर दिया अभिजीत काले का करियर
क्रिकेट में महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने जूनियर से लेकर इंटरनेशनल लेवल पर गरदा उड़ाया। सचिन के साथ अनेक खिलाड़ियों ने करियर शुरू किया लेकिन बहुतों को गुमनामी का अंधेरा नसीब हुआ।
अभिजीत काले भी ऐसे ही एक क्रिकेटर रहे। उन्होंने 1987-88 में बॉम्बे के बेस्ट जूनियर क्रिकेटर का अवॉर्ड सचिन के साथ शेयर किया था लेकिन उनका करियर एक अलग ही दिशा में चला गया। सचिन ने बॉम्बे अंडर-17 टीम की कप्तानी की थी जिसमें विनोद कांबली, जतिन परांजपे और अभिजीत भी शामिल थे।
अभिजीत का फर्स्ट क्लास करियर शानदार रहा। उन्होंने 93 मैचों में 54.45 की औसत से 7134 रन बनाए। उन्होंने 25 शतक और 28 अर्धशतक जमाए, जिसमें उनका हाईएस्ट स्कोर नाबाद 248 था। जब बॉम्बे टीम में जगह बनाना मुश्किल हो गया था तो वह महाराष्ट्र की टीम में चले गए, जहां खूब रन बनाए।

सिलेक्टर्स के लिए अभिजीत को नजरअंदाज़ करना मुश्किल हो गया था। उन्होंने नवंबर 2001 में जयपुर में इंग्लैंड के खिलाफ इंडिया ए के लिए 122 रनों की कमाल की पारी खेली थी। उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ बोर्ड प्रेसिडेंट इलेवन के लिए 90 रन बनाए और इंडिया ए के साथ साउथ अफ्रीका दौरे पर गए। उन्होंने साउथ अफ्रीका ए के खिलाफ 75 रन जुटाए थे। उन्हें लंबे फॉर्मेट का बेहतरीन बल्लेबाज माना जाता था।
हालांकि, दिलचस्प बात यह रही कि जब अभिजीत को राष्ट्रीय टीम से बुलावा वनडे के लिए आया। उन्होंने अप्रैल 2003 में ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ 29 साल और 287 दिन की उम्र में अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था। कई जाने-माने खिलाड़ी दौरे से बाहर थे, जिससे उनकी जगह बनी। उन्होंने 22 गेंदों में 10 रन बनाए।
अभिजीत को इंटरनेशनल क्रिकेट में कभी दूसरा मौका नहीं मिला। एक मैच ही उनका पूरा इंटरनेशनल करियर बन गया। फिर उनकी कहानी और भी बुरी तरह उलझी गई। 2003 में नेशनल सिलेक्टर किरण मोरे और प्रणब रॉय ने अभिजीत पर सिलेक्शन के सिलसिले में उन्हें 10-10 लाख रुपये के ऑफर का आरोप लगाया।
अभिजीत ने इस तरह के ऑफर से इनकार किया। बीसीसीआई की कार्रवाई के दौरान उन्होंने माना कि सिलेक्टरों से संपर्क करके उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की थी। उन्होंने ऐसा करने के लिए माफी भी मांगी। बोर्ड ने उन्हें गलत व्यवहार और अनुशासनहीनता का दोषी पाया और 2004 के आखिर तक बैन कर दिया था।
अभिजीत पर रिश्वत का आरोप लगा तब न्यूज एजेंसी ने शेट्टी के हवाले से बताया, ”खिलाड़ी ने इंडिया ए टीम में जगह के लिए कुछ सिलेक्टर्स को पैसे देने का ऑफर दिया था। मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि खिलाड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” वहीं, अभिजीत ने माफीनामे में कहा था, ”इस पूरे मामले ने बेवजह भारतीय क्रिकेट बोर्ड की इमेज खराब की।
मैं मानता हूं कि सिलेक्टर्स से सीधे या अपने माता-पिता के जरिए बात करके उन्हें प्रभावित करना मेरी तरफ से गलत था। मैं सिलेक्टर्स को पैसे ऑफर करने के मामले में कहना चाहता हूं कि मुझे गलत समझा गया और मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। मैं अपने इस काम के लिए बिना किसी शर्त के माफी मांगता हूं।”
पैसे ऑफर करने का आरोप का कभी भी डायरेक्ट प्रूफ साबित नहीं हुआ, जिसे तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने खुद माना था। अभिजीत की सजा उस गलत काम के आधार पर थी जिसे उन्होंने स्वीकार किया। उसके बाद अभिजीत का करियर ढलान की ओर चला गया।