राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक आज, CEO के नाम पर लगेगी मुहर! राजेश पांडेय सबसे मजबूत दावेदार

अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर तस्वीर अब जल्द साफ हो सकती है। CEO पद के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने 1 सितंबर को अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। अब बुधवार, 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की अहम बैठक में संभावित नामों पर चर्चा के बाद अंतिम नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है।CEO पद की दौड़ में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर सामने आ रहा है। उनकी प्रोफाइल को खास बनाने वाली बात उनका लंबा पुलिस और प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थान के प्रबंधन से जुड़ा उनका प्रत्यक्ष अनुभव भी है। राजेश पांडेय लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के ट्रस्ट के सचिव भी हैं।राजेश पांडेय की दावेदारी क्यों मजबूत?राम मंदिर CEO की जिम्मेदारी केवल कार्यालयी प्रशासन तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या, मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं, सुरक्षा, सरकारी विभागों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, VIP और आम श्रद्धालुओं के लिए इंतजाम तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी CEO की जिम्मेदारियों में शामिल हो सकती है।ऐसे में पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था का अनुभव रखने वाले अधिकारी की भूमिका अहम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय को सेवा के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने का अनुभव रहा है। इसके अलावा धार्मिक संस्थान के प्रबंधन से उनका जुड़ाव उनकी दावेदारी को अन्य नामों से अलग करता है।हालांकि अंतिम फैसला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को ही करना है। ट्रस्ट की ओर से अभी सर्च कमेटी द्वारा सुझाए गए नामों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र भी दौड़ मेंCEO पद के संभावित दावेदारों में बिहार कैडर के पूर्व IPS अधिकारी और पूर्व DGP परेश सक्सेना का नाम भी चर्चा में है। पुलिस और प्रशासन में लंबे अनुभव के कारण उन्हें भी मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है।इसके अलावा उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IAS अधिकारी दिनेश चंद्र भी संभावित नामों में शामिल हैं। वह जौनपुर के जिलाधिकारी रह चुके हैं और जिला प्रशासन में बड़े स्तर की व्यवस्थाओं को संभालने का अनुभव रखते हैं।राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान का नाम भी CEO पद के संभावित दावेदारों में चर्चा में है। हालांकि सर्च कमेटी ने अंतिम तौर पर किन तीन नामों की सिफारिश की है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।CEO नियुक्ति के साथ कई बड़े फैसलों पर मंथनट्रस्ट की बैठक बुधवार दोपहर 3 बजे मणिरामदास की छावनी में होगी। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास करेंगे। ज्यादातर ट्रस्टी अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की डीड और न्यास नियमावली में संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने रामलला के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दोनों ने मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद बैठक की तैयारियों की जानकारी ली।चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर भी नजरबैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी कोई फैसला हो सकता है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। हालांकि हाल के दिनों में दोनों की सामाजिक गतिविधियां बढ़ी हैं, जिसके बाद ट्रस्ट में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं।सूत्रों के मुताबिक, जांच की मौजूदा स्थिति में चंपत राय को लेकर राहत की बात सामने आने के बाद उनके दोबारा ट्रस्ट से जुड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। हालांकि इस बारे में कोई अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा। डॉ. अनिल मिश्र को लेकर ट्रस्ट क्या रुख अपनाता है, इस पर भी नजर रहेगी।संघ और VHP पदाधिकारियों की अयोध्या में मौजूदगी से बढ़ी हलचलबैठक से पहले संघ और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के अयोध्या पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है। VHP के महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संरक्षक दिनेश चंद्र और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह के अयोध्या पहुंचने की बात कही जा रही है।बताया जा रहा है कि संघ और VHP के पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात भी की है। इस दौरान बंद कमरे में बातचीत हुई। उनकी मौजूदगी और ट्रस्ट की अहम बैठक को देखते हुए CEO नियुक्ति के साथ डीड में संभावित संशोधन और अन्य संगठनात्मक फैसलों को लेकर अयोध्या में चर्चाएं तेज हो गई हैं।अब सबकी निगाहें बुधवार को होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बैठक में राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी और अगर लगेगी तो जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी।