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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद, CJP ने 5 सितंबर का मार्च लिया वापस

राघवेंद्र प्रताप सिंह

नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर जुलाई महीने में देश भर में हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को एक बड़ी राहत दी है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) रद करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले और केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 5 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित अपना विरोध मार्च वापस ले लिया है।

छात्रों को बड़ी राहत, लेकिन ‘आपराधिक रिकॉर्ड’ वालों पर एक्शन जारी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में केवल हिस्सा लेने को अपराध नहीं माना जाएगा और छात्रों का भविष्य खराब नहीं होना चाहिए।
इस आदेश के तहत दिल्ली, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामले रद माने जाएंगे।
हालांकि, इस फैसले में एक अपवाद भी रखा गया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी है, जिनका पहले से गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Antecedents) रहा है।

केंद्र सरकार ने अदालत में दिए 3 अहम आश्वासन
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में तीन बड़े आश्वासन दिए, जिसके आधार पर ही मामला सुलझा:

  1. पुरानी FIR की वापसी: 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे।
  2. कोई नई FIR नहीं: भविष्य में इन घटनाओं के संदर्भ में छात्रों पर कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
  3. पीड़ित परिवारों को मुआवजा: नीट विवाद और पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। केंद्र ने अदालत से इसके तौर-तरीके तय करने और मुआवजा राशि जारी करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया है।

CJP ने रद्द किया 5 सितंबर का मार्च
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले और केंद्र के आश्वासनों के बाद CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने अदालत को सूचित किया कि उनका संगठन 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक होने वाले अपने प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च को वापस ले रहा है।

निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन हजारों निर्दोष छात्रों और युवाओं के लिए एक ‘हीलिंग बाम’ (Healing Balm) की तरह है, जो अपने हक की आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतरे थे। इस कदम से सरकार और छात्रों के बीच तनाव अब खत्म होने की उम्मीद है।