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‘आंखों के सामने देखी मौत’: नेपाल की भीषण बाढ़ से सुरक्षित असम लौटे 8 मजदूरों ने बयां किया तबाही का खौफनाक मंजर

अभिषेक सिंह

गुवाहाटी/असम: नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस जल प्रलय के बीच फंसे असम के 8 मजदूर किसी तरह सुरक्षित अपने वतन लौट आए हैं। मौत को बिल्कुल सामने से देखकर लौटे इन मजदूरों की आंखों में तबाही का खौफ अब भी साफ नजर आ रहा है। घर वापसी पर अपने परिवारों से गले मिलकर रोते हुए इन मजदूरों ने उस खौफनाक रात का मंजर बयां किया है, जब प्रकृति ने अपना सबसे रौद्र रूप दिखाया था और पल भर में सब कुछ तबाह हो गया।

‘कुछ ही मिनटों में सब कुछ पानी में बह गया’
असम के विभिन्न जिलों से रोजी-रोटी कमाने नेपाल गए इन मजदूरों ने बताया कि जिस वक्त बाढ़ आई, वे काठमांडू के बाहरी इलाके में एक कंस्ट्रक्शन साइट के पास अपने टिन के कैंप में सो रहे थे।

  • अचानक आया सैलाब: आधी रात को अचानक पहाड़ों की तरफ से तेज आवाज के साथ पानी और मलबे का रेला आया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उनके कैंप और आसपास के कई कच्चे मकान पानी की तेज धार में बहने लगे।
  • छतों और पेड़ों पर गुजारी रातें: अपनी जान बचाने के लिए ये सभी मजदूर एक निर्माणाधीन ऊंची इमारत की छत पर भागकर चढ़ गए। मजदूरों ने भारी मन से बताया, “हमारे सामने कई लोग, गाड़ियां और मवेशी पानी में बह गए, लेकिन हम बेबस थे। हमें लगा कि अब हमारी भी जान नहीं बचेगी।”
  • भूख और प्यास से जंग: लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच इन मजदूरों ने बिना कुछ खाए-पिए कई दिन और रातें खौफ के साए में गुजारीं। पीने के लिए एक बूंद साफ पानी तक उपलब्ध नहीं था।

भारतीय दूतावास की मदद से वतन वापसी
स्थिति थोड़ी सामान्य होने और पानी का स्तर घटने के बाद, स्थानीय बचाव दलों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद भारतीय दूतावास (Indian Embassy) के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया। दूतावास की त्वरित कार्रवाई और भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत अभियानों की मदद से इन सभी मजदूरों को सुरक्षित भारतीय सीमा तक लाया गया, जहां से वे ट्रेन के जरिए अपने गृह राज्य असम पहुंच सके।

परिजनों की आंखों में छलक पड़े खुशी के आंसू
कई दिनों तक संपर्क पूरी तरह से टूटे रहने के कारण असम में बैठे उनके परिवारों ने लगभग अनहोनी की आशंका मान ली थी। लेकिन जैसे ही ये 8 मजदूर अपने गांव पहुंचे, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई और परिजनों के आंसू छलक पड़े। परिवारों ने इसे अपनों का दूसरा जन्म बताया है।

प्रवासी मजदूरों के लिए भयानक सपना
नेपाल की यह तबाही उन हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए एक भयानक सपने की तरह साबित हुई है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में वहां गए थे। असम के इन मजदूरों की सुरक्षित वापसी भारतीय दूतावास की सक्रियता का बेहतरीन उदाहरण है। भले ही ये लोग अब अपने घरों में सुरक्षित हैं, लेकिन नेपाल में मौत से हुए उस आमने-सामने के खौफनाक पल को वे ताउम्र नहीं भूल पाएंगे।