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क्या ‘नॉटी बॉय’ वापस दिलाएगा ISRO का खोया हुआ भरोसा? आज रात होगा GSLV-F17 का लॉन्च

विवेक ओझा
श्रीहरिकोटा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अंतरिक्ष विज्ञान और उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में अपने आठ महीने के लंबे सूखे को समाप्त करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। चंद्रयान और आदित्य-एल1 जैसे ऐतिहासिक मिशनों की सफलता के बाद, आज पूरी दुनिया की नज़रें इसरो के एक बेहद जटिल और महत्वपूर्ण मिशन पर टिकी हैं। आज रात, भारत का शक्तिशाली लेकिन अप्रत्याशित रॉकेट GSLV-F17 उड़ान भरने जा रहा है, जिसे इसरो के गलियारों में इसके पुराने खराब रिकॉर्ड के कारण ‘नॉटी बॉय’ (Naughty Boy) यानी शरारती लड़के का नाम दिया गया था। इस लॉन्च की सफलता न केवल इसरो के लिए तकनीकी रूप से अहम है, बल्कि यह भविष्य के भारी पेलोड मिशनों के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

आधिकारिक घोषणा के अनुसार, GSLV-F17 / EOS-05 मिशन का प्रक्षेपण 4 सितंबर 2026 को भारतीय समयानुसार तड़के 02:55 बजे निर्धारित किया गया है। यह शानदार प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) के दूसरे लॉन्च पैड (SLP) से किया जाएगा। उल्टी गिनती शुरू होने से पहले ही रॉकेट को व्हीकल असेंबली बिल्डिंग से निकालकर नाभि टॉवर (Umbilical Tower) तक सफलतापूर्वक पहुंचा दिया गया है। यह मिशन इसरो के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 19वीं उड़ान है।

इस मिशन को जो चीज़ सबसे खास बनाती है, वह है इसका मुख्य पेलोड—EOS-05 (Earth Observation Satellite-05), जिसे पहले GISAT-1A के नाम से भी जाना जाता था। यह कोई साधारण उपग्रह नहीं है; यह एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन अंतरिक्ष यान है। इसरो के अनुसार, EOS-05 जियोसिंक्रोनस कक्षा (Geosynchronous orbit) से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट होगा। आमतौर पर अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा (Low-Earth Orbit) में स्थापित किए जाते हैं, जो किसी क्षेत्र विशेष के ऊपर से कुछ ही समय के लिए गुज़रते हैं। लेकिन EOS-05 पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित होगा, जो इसे भारतीय उपमहाद्वीप और आसपास के क्षेत्रों पर लगातार 24 घंटे नज़र रखने की क्षमता प्रदान करेगा।

प्रक्षेपण प्रक्रिया के तहत, GSLV-F17 इस उपग्रह को सीधे उसकी अंतिम कक्षा में नहीं छोड़ेगा, बल्कि इसे ‘सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट’ (Sub-GTO) में इंजेक्ट करेगा। इसके बाद उपग्रह अपनी स्वयं की ऑनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली (propulsion system) का उपयोग करके धीरे-धीरे अपनी कक्षा को ऊपर उठाएगा और अपनी निर्धारित जगह पर स्थापित होगा।

लेकिन इस मिशन से इसरो की धड़कनें इसलिए भी बढ़ी हुई हैं क्योंकि इस रॉकेट का अतीत काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अपने शुरुआती वर्षों में इस रॉकेट की 18 में से 6 उड़ानें पूरी तरह से विफल रही थीं, जिसके कारण ही इसे ‘नॉटी बॉय’ का कुख्यात उपनाम मिला था। इसके अतिरिक्त, अगस्त 2021 में इसी श्रेणी के एक पिछले मिशन (GSLV-F10) में क्रायोजेनिक अपर स्टेज में खराबी आ जाने के कारण उपग्रह कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था।

इसलिए, इसरो के लिए यह मिशन एक सामान्य लॉन्च से कहीं बढ़कर है। यह भारत की जियोसिंक्रोनस इमेजिंग क्षमता को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण दूसरा प्रयास है। यदि यह मिशन सफल होता है, तो भारत को मौसम की सटीक निगरानी, आपदा प्रबंधन (जैसे बाढ़, चक्रवात और जंगल की आग की ट्रैकिंग), और कृषि अवलोकन के क्षेत्र में अंतरिक्ष से एक स्थायी ‘तीसरी आंख’ मिल जाएगी। इसरो के वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि उनका यह ‘नॉटी बॉय’ इस बार पूरी तरह से आज्ञाकारी साबित होगा और देश के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया सुनहरा पन्ना जोड़ेगा।