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गैंगवार में गुड्डू बादशाह की हत्या : दिल्ली पुलिस ने सुलझाई गुत्थी, 12000 KM की दूरी तय कर 5 राज्यों से 8 दबोचे

सरिता त्रिपाठी
नई दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पूर्व ज़िले में पुल प्रह्लादपुर के लाल कुआं इलाके में हुए दुस्साहसिक ‘गुड्डू बादशाह’ हत्याकांड ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्थानीय टीमों ने एक बेहद जटिल और हाई-टेक जांच को अंजाम देते हुए इस खौफनाक वारदात की गुत्थी को पूरी तरह से सुलझा लिया है। इस हत्या के पीछे एक गहरी साज़िश और पुरानी रंजिश का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस को क्रैक करने के लिए 12,000 किलोमीटर लंबा और थका देने वाला एक अंतरराज्यीय ऑपरेशन चलाया, जिसके तहत पांच राज्यों से आठ शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

यह पूरा मामला 28 जुलाई का है, जब पुलिस को लाल कुआं स्थित एक किराए के गोदाम में फायरिंग की पीसीआर कॉल मिली थी। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो वहां मोहम्मद इरशाद आलम उर्फ ‘गुड्डू बादशाह’ मृत अवस्था में मिला, जबकि उसका एक कथित जानकार मोहम्मद फारुख गोली लगने से घायल था। शुरुआत में फारुख ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और खुद को इस हमले का एक निर्दोष पीड़ित बताया। लेकिन पुलिस की तकनीकी निगरानी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के विश्लेषण ने फारुख के झूठ की पोल खोल दी। जांच में पता चला कि फारुख इस खौफनाक साज़िश का एक अहम मोहरा था, जिसने गुड्डू बादशाह का विश्वास जीतकर उसे धोखे से उस मौत के गोदाम तक पहुंचाया था।

इस सनसनीखेज हत्याकांड की जड़ें दिल्ली से कोसों दूर बिहार के सुपौल जिले की एक पुरानी रंजिश से जुड़ी हुई थीं। पुलिस के मुताबिक, मुख्य साज़िशकर्ता मोहम्मद शमशाद और मोहम्मद अशफाक का गुड्डू बादशाह के साथ पुराना विवाद चल रहा था। इसी पुरानी दुश्मनी को खत्म करने और समझौता करने का झांसा देकर गुड्डू को बिहार से दिल्ली बुलाया गया था। लाल कुआं का वह गोदाम एक मौत के जाल (Trap) की तरह इस्तेमाल किया गया था, जहां पहुंचते ही साज़िशकर्ताओं ने गुड्डू को गोलियों से भून दिया।

अपराध को अंजाम देने के बाद पुलिस से बचने के लिए आरोपियों ने एक बेहद शातिर ‘एस्केप प्लान’ तैयार किया था। वे इंटरनेट कॉलिंग के ज़रिए आपस में संपर्क कर रहे थे और पुलिस की ट्रैकिंग से बचने के लिए लगातार अपने मोबाइल फोन बंद करके अपनी लोकेशन बदल रहे थे। लेकिन दिल्ली पुलिस की तकनीकी टीम, इंटरनेट कॉलिंग ट्रैकिंग, सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण और ग्राउंड इंटेलिजेंस ने उनके हर मंसूबे को नाकाम कर दिया। पुलिस की टीमों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और सुदूर तमिलनाडु तक लगातार छापेमारी की। एक आरोपी मोहम्मद आफताब को तमिलनाडु के तिरुप्पुर से धर दबोचा गया।

गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों की पहचान मोहम्मद फारुख, मोहम्मद आफताब, मोहम्मद इरफान, मोहम्मद शमशाद, मोहम्मद अशफाक, मोहम्मद रहमतुल्लाह उर्फ छोटू, अमन यादव और मोहम्मद शोएब अख्तर के रूप में हुई है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि अमन यादव नामक स्थानीय युवक ने पैसों के लालच में न केवल आरोपियों के ठहरने का इंतजाम किया, बल्कि वारदात की रात वह आफताब, रहमतुल्लाह और शोएब को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाकर मौका-ए-वारदात पर ले गया और खुद भी इस अंधाधुंध गोलीबारी में शामिल रहा। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर एक अवैध पिस्तौल, एक एक्स्ट्रा मैगजीन और कारतूस भी बरामद कर लिए हैं, जबकि अन्य हथियारों की तलाश अभी जारी है। यह सफल ऑपरेशन दिल्ली पुलिस की पेशेवर दक्षता और अंतरराज्यीय समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया है।