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9 दिन, ‘मौत की सुरंग’ और एक चमत्कार… नेपाल की भयानक बाढ़ में कैसे बची 2 मजदूरों की जान? रोंगटे खड़े कर देने वाली इनसाइड स्टोरी

अभिषेक सिंह
काठमांडू/नेपाल:
नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने जहां सैकड़ों जिंदगियां निगल लीं, वहीं प्रकृति के इसी खौफनाक तांडव के बीच एक ऐसा चमत्कार हुआ है जिस पर यकीन करना मुश्किल है। एक निर्माणाधीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की गहरी और संकरी सुरंग में 9 दिनों तक दबे रहने के बाद दो मजदूरों को जिंदा बाहर निकाल लिया गया है। बिना अन्न, बिना रोशनी और मौत के साये में गुजरे इन 216 घंटों की कहानी किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं है।

अचानक आई जल-प्रलय: जब चंद सेकंड में ‘कब्रगाह’ बन गई सुरंग!
यह खौफनाक मंजर तब शुरू हुआ जब अचानक आई फ्लैश फ्लड (Flash Flood) का मलबा और पानी तेज रफ्तार से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की उस सुरंग में घुसने लगा, जहां ये मजदूर काम कर रहे थे। पलक झपकते ही बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता टनों मलबे, कीचड़ और भारी पत्थरों से पूरी तरह ब्लॉक हो गया। सुरंग के अंदर घुटनों तक पानी भर चुका था और चारों तरफ सिर्फ मौत का घुप्प अंधेरा छा गया। बाहर की दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट चुका था और किसी को भी उनके जिंदा बचने की उम्मीद नहीं थी।

बिना अन्न-जल 9 दिन का खौफ: अंधेरी सुरंग में ‘एयर पॉकेट’ ने ऐसे किया जीवनदान का चमत्कार
सुरंग के अंदर हर गुजरता पल मौत की दस्तक दे रहा था। भूख और ठंड से शरीर सुन्न पड़ने लगा था, लेकिन इसी बीच ‘एयर पॉकेट’ (Air Pocket) उनके लिए भगवान का वरदान साबित हुआ। मलबे के बीच कुछ खाली जगह बच गई थी, जहां से उन्हें थोड़ी-बहुत ऑक्सीजन मिल रही थी, जिससे उनका दम नहीं घुटा। जिंदा रहने की जिद में इन मजदूरों ने सुरंग की दीवारों से रिसने वाले मटमैले पानी को पीकर 9 दिन गुजारे। यह सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि एक भयानक मानसिक जंग भी थी, जहां हर पल उन्हें लगता था कि शायद ये उनकी जिंदगी की आखिरी सांस है।

9वें दिन फरिश्ता बनकर पहुंची रेस्क्यू टीम: वो भावुक पल जब मौत के मुंह से छीन लाए 2 सांसें!
बाहर रेस्क्यू टीमें लगातार मलबे को हटाने के काम में जुटी थीं, हालांकि उन्हें भी कोई चमत्कार होने की उम्मीद नहीं थी। लेकिन 9वें दिन, जब भारी मशीनों ने मलबे का एक बड़ा हिस्सा साफ किया, तो अंदर से जिंदगी की एक कमजोर आवाज सुनाई दी। इस आवाज ने पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में नई जान फूंक दी। जब दोनों मजदूरों को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

जिंदगी की सबसे बड़ी जीत
नेपाल की यह घटना इस बात का सबसे बड़ा सुबूत है कि इंसानी जज्बा और जीने की इच्छाशक्ति मौत को भी मात दे सकती है। ‘मौत की सुरंग’ से इन दो मजदूरों का जिंदा लौटना आपदा प्रबंधन के इतिहास में एक ऐसा अध्याय बन गया है, जो दुनिया को कभी हार न मानने की प्रेरणा देता रहेगा।