पेंगुइन ने मोड़ा मुंह तो हार्परकॉलिन्स ने थामा हाथ! सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging’ में आखिर कौन से बड़े राज खोलने वाली हैं यूपीए चेयरपर्सन?

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति की सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी शख्सियतों में से एक, सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग’ (Belonging) एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। दुनिया के मशहूर पब्लिशिंग हाउस ‘पेंगुइन’ (Penguin) द्वारा इस किताब को छापने से अचानक इनकार करने के बाद राजनीतिक और साहित्यिक गलियारों में हड़कंप मच गया था। लेकिन अब इस बहुप्रतीक्षित किताब को अपना नया ठिकाना मिल गया है। प्रतिष्ठित प्रकाशक ‘हार्परकॉलिन्स’ (HarperCollins) ने इस बायोग्राफी को छापने का बड़ा जिम्मा उठाया है, जिसके बाद से दिल्ली के सियासी पारे में फिर से उबाल आ गया है।
पेंगुइन की ‘ना’ के पीछे आखिर क्या है असली खेल?
पेंगुइन जैसे दिग्गज पब्लिशर ने सोनिया गांधी जैसी कद्दावर नेता की किताब से अपने कदम पीछे क्यों खींचे? यह सवाल हर किसी के जहन में गूंज रहा है। साहित्यिक और राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस इनकार के पीछे किताब में किए गए कुछ ‘विस्फोटक’ सियासी खुलासे और संवेदनशील मुद्दे हो सकते हैं, जिन्हें पब्लिशर विवाद का कारण मान रहा हो। हालांकि, आधिकारिक तौर पर कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है, लेकिन इस रहस्यमयी ‘ना’ ने ‘बिलॉन्गिंग’ को लेकर देशवासियों की उत्सुकता को चरम पर पहुंचा दिया है।
‘बिलॉन्गिंग’ में दबे हैं सियासत के कई तूफान! किन अनसुने किस्सों से उठेगा पर्दा?
सोनिया गांधी का राजनीतिक जीवन हमेशा से एक बंद तिजोरी की तरह रहा है। इटली की सड़कों से लेकर भारत के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार की बहू बनने और फिर कांग्रेस पार्टी की कमान संभालने तक— उनके जीवन में कई ऐसे ऐतिहासिक मोड़ आए हैं, जिन पर से आज तक पर्दा नहीं उठा है। माना जा रहा है कि इस किताब में कई बड़े राज खुलेंगे:
- 2004 का ऐतिहासिक ‘त्याग’: प्रधानमंत्री पद ठुकराने के फैसले के पीछे असली अंदरूनी राजनीतिक दबाव क्या था?
- मनमोहन सरकार की ‘इनसाइड स्टोरी’: यूपीए (UPA) सरकार के 10 सालों में मनमोहन सिंह के साथ उनके रिश्ते और सत्ता के दो केंद्रों की असल कहानी।
- त्रासदियां और परिवार: इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या के बाद के उन मुश्किल हालातों की सच्चाई, जिसका सामना उन्होंने एक पत्नी और मां के तौर पर किया।
हार्परकॉलिन्स का मास्टरस्ट्रोक: रिलीज होते ही मचेगी राजनीतिक खलबली!
पेंगुइन के हाथ खींचने के बाद हार्परकॉलिन्स के लिए इस किताब के प्रकाशन अधिकार हासिल करना एक बहुत बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ (Masterstroke) माना जा रहा है। प्रकाशन जगत के जानकारों का दावा है कि रिलीज होते ही यह किताब न केवल रिकॉर्ड तोड़ बिक्री करेगी, बल्कि विपक्षी दलों और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस भी छेड़ देगी।
सोनिया गांधी की आत्मकथा का आना महज एक किताब का प्रकाशन नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी भारतीय राजनीति के उन पन्नों का खुलना है, जिन्हें अब तक सत्ता के गलियारों में छिपा कर रखा गया था। अब पूरे देश की निगाहें इसकी आधिकारिक रिलीज डेट पर टिकी हैं।