कंफर्म टिकट, फिर भी आधी रात को ट्रेन से उतारा और भेज दिया जेल! बेकसूर महिला की गई नौकरी… अब रेलवे भरेगा भारी जुर्माना

सरिता त्रिपाठी
केरल: भारतीय रेलवे में सफर करने वाले हर यात्री को यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए। क्या हो अगर आपकी जेब में ट्रेन का कंफर्म टिकट हो, लेकिन फिर भी टीटीई (TTE) आपको आधी रात को ट्रेन से उतार दे और पुलिस आपको गिरफ्तार कर ले? केरल से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां एक महिला यात्री को उसकी कोई गलती न होने के बावजूद ऐसी भयानक प्रताड़ना झेलनी पड़ी कि उसकी नौकरी तक चली गई। लेकिन अब अदालत ने इस घोर लापरवाही पर रेलवे को तगड़ा झटका देते हुए लाखों रुपये का जुर्माना ठोका है।
आधी रात का खौफ: कंफर्म टिकट होने के बावजूद टीटीई की मनमानी!
जानकारी के अनुसार, महिला अपनी निर्धारित ट्रेन में वैध और कंफर्म टिकट के साथ सफर कर रही थी। सफर के दौरान टीटीई ने टिकट चेक किया और बिना किसी ठोस व जायज कारण के महिला के साथ बहस शुरू कर दी। टीटीई की मनमानी इस कदर बढ़ गई कि उसने नियमों और इंसानियत दोनों को ताक पर रख दिया। एक अकेली महिला को आधी रात के वक्त, घोर अंधेरे में एक अनजान रेलवे स्टेशन पर जबरन ट्रेन से नीचे उतार दिया गया।
बेकसूर होने पर भी खानी पड़ी जेल की हवा, छिन गया रोजगार
इस खौफनाक अनुभव के बीच रेलवे पुलिस ने भी महिला की कोई बात नहीं सुनी और मदद करने के बजाय उसे हिरासत में ले लिया। एक बेकसूर और प्रतिष्ठित महिला को अपराधियों की तरह थाने ले जाकर गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरे फर्जी केस, मानसिक प्रताड़ना और पुलिसिया कार्रवाई के कारण महिला समय पर अपने ऑफिस नहीं पहुंच सकी और अंततः उसे अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। रेलवे की एक गलती ने उसकी पूरी जिंदगी में भूचाल ला दिया।
अदालत का रेलवे पर चाबुक: ‘2 लाख चुकाओ, यह सेवा में घोर लापरवाही है’
दर-दर भटकने के बाद इंसाफ के लिए महिला ने उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Court) का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने जब साक्ष्यों की जांच की, तो रेलवे और उसके स्टाफ की भारी लापरवाही खुलकर सामने आ गई। अदालत ने इसे ‘सेवा में घोर कमी’, ‘संवेदनहीनता’ और ‘मानसिक प्रताड़ना’ का गंभीर मामला मानते हुए रेलवे को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सख्त आदेश दिया कि रेलवे प्रशासन इस महिला को मानसिक संताप, नौकरी के नुकसान और कानूनी खर्च के एवज में 2 लाख रुपये का भारी-भरकम मुआवजा अदा करे।
यह ऐतिहासिक फैसला उन लापरवाह रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक कड़ा सबक है, जो अपनी वर्दी के नशे में चूर होकर आम यात्रियों के अधिकारों को कुचलते हैं। इस फैसले ने यह भी साबित कर दिया है कि अगर सिस्टम अन्याय करे, तो कानून के दरवाजे खटखटाकर न्याय पाया जा सकता है।