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राघव चड्ढा के बाद अब पटियाला के सांसद का नाम भी ‘पंजाब SIR’ से गायब! भड़के MP ने फोड़ा बम- ‘अब जनता नहीं, सरकार खुद चुन रही अपने वोटर’

विवेक ओझा
चंडीगढ़/पंजाब:
पंजाब की सियासत में इन दिनों ‘स्टेट इंफॉर्मेशन रजिस्टर’ (Punjab SIR) के डेटाबेस को लेकर एक बड़ा भूचाल आ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बाद अब पटियाला से कांग्रेस के दिग्गज सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी का नाम भी इस महत्वपूर्ण सरकारी डेटाबेस से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। हैरानी की बात यह है कि सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार का रिकॉर्ड इस लिस्ट से नदारद है। इस बड़ी गड़बड़ी के सामने आते ही राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

‘लोकतंत्र का मजाक या कोई बड़ी साजिश?’ नाम कटने पर आगबबूला हुए सांसद
सरकारी रिकॉर्ड से अपना और अपने परिवार का नाम गायब देखकर डॉ. धर्मवीर गांधी ने सिस्टम पर करारा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए एक बेहद तीखा बयान दिया। सांसद ने तंज कसते हुए कहा, “लोकतंत्र में पहले जनता अपनी सरकार चुनती थी, लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल गए हैं। अब लोग सरकार नहीं चुन रहे, बल्कि सरकारें खुद अपनी सहूलियत के हिसाब से अपने वोटर चुन रही हैं।” उनका यह तल्ख बयान अब सियासी गलियारों में आग की तरह फैल रहा है।

राघव चड्ढा के साथ भी हो चुका है ऐसा ‘डिजिटल खेल’
यह किसी हाई-प्रोफाइल नेता का नाम गायब होने का पहला मामला नहीं है। इससे कुछ ही समय पहले आम आदमी पार्टी के चर्चित चेहरे राघव चड्ढा का नाम भी इसी तरह सिस्टम से गायब पाया गया था। एक के बाद एक मौजूदा सांसदों और उनके परिवारों का नाम सरकारी डेटाबेस से डिलीट होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली, पोर्टल की सुरक्षा और उसकी विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। जनता के बीच भी यह संदेश जा रहा है कि जब बड़े-बड़े सांसदों का डेटा सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की क्या बिसात?

विवाद बढ़ता देख बैकफुट पर आया प्रशासन, अधिकारियों ने दी ये सफाई
सांसदों की तीखी बयानबाजी और बढ़ता सियासी घमासान देख प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। अधिकारियों ने इस भारी चूक पर पर्दा डालते हुए अपनी सफाई पेश की है। चुनाव आयोग और संबंधित विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी का भी नाम जानबूझकर नहीं काटा गया है, बल्कि यह एक बड़ी ‘तकनीकी खामी’ (Technical Glitch) या सॉफ्टवेयर अपडेशन के दौरान हुई गड़बड़ी का नतीजा है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है और जल्द ही इस बड़ी त्रुटि को सुधार कर नामों को दोबारा पोर्टल पर अपडेट कर दिया जाएगा।

निष्कर्ष
भले ही अधिकारी इसे महज एक तकनीकी फॉल्ट बता रहे हों, लेकिन डिजिटल इंडिया के दौर में जनसांख्यिकीय और मतदाता सूचियों से जुड़ी इतनी बड़ी चूक लोकतंत्र में संदेह के बीज बोती है। इस घटना ने विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार और सिस्टम को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।