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‘न ट्रेन की सीटी बजी, न अस्पतालों में मिला इलाज…’ सिकंदरपुर में विकास का डब्बा गुल! विधायक के ‘रिपोर्ट कार्ड’ में खुलकर सामने आई कड़वी सच्चाई

राघवेंद्र प्रताप सिंह
बलिया/सिकंदरपुर:
चुनाव आते हैं, बड़े-बड़े वादे होते हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत क्या है? बलिया जिले की महत्वपूर्ण सिकंदरपुर विधानसभा सीट का ‘रिपोर्ट कार्ड’ जब सामने आया, तो विकास के तमाम दावों की पूरी तरह पोल खुल गई। क्षेत्र की जनता आज भी उन बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, जो किसी भी सभ्य समाज का पहला हक होती हैं। चाहे बात रेल कनेक्टिविटी की हो, या फिर बदहाल शिक्षा और स्वास्थ्य की— सिकंदरपुर का इलाका आज भी पिछड़ेपन के आंसू बहा रहा है और जनता अपने जनप्रतिनिधियों से तीखे सवाल पूछ रही है।

रेल कनेक्टिविटी का अधूरा सपना: दशकों से सिर्फ कोरा आश्वासन!
डिजिटल इंडिया और बुलेट ट्रेन के इस दौर में सिकंदरपुर का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि यह पूरा क्षेत्र आज भी रेलवे नेटवर्क से पूरी तरह अछूता है।

  • स्थानीय लोगों, व्यापारियों और छात्रों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए मीलों दूर दूसरे स्टेशनों की खाक छाननी पड़ती है।
  • हर चुनाव में यहां रेल लाइन बिछाने का मुद्दा जोर-शोर से उठता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादों की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। ट्रेन न होने के कारण इस इलाके का व्यापारिक और औद्योगिक विकास पूरी तरह से ठप पड़ा है।

‘बीमार’ पड़ा स्वास्थ्य महकमा और राम भरोसे शिक्षा व्यवस्था
अगर आपको लगता है कि यहां सिर्फ यातायात की समस्या है, तो स्वास्थ्य और शिक्षा के मोर्चे पर हालात और भी ज्यादा डरावने हैं:

  • भगवान भरोसे अस्पताल: कहने को तो इलाके में स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन यहां न तो पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती है और न ही गंभीर हादसों से निपटने के लिए आधुनिक इमरजेंसी सुविधाएं। छोटी सी गंभीर बीमारी होने पर भी मरीजों को जिला अस्पताल या बड़े शहरों की ओर रेफर कर दिया जाता है, जिससे कई बार रास्ते में ही मरीजों की जान चली जाती है।
  • शिक्षा का गिरता स्तर: शिक्षा व्यवस्था का हाल भी बेहाल है। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की कमी और जर्जर बुनियादी ढांचे के कारण युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है। अच्छी और उच्च शिक्षा के लिए छात्रों का दूसरे शहरों की तरफ पलायन करना एक बड़ी मजबूरी बन गया है।

रिपोर्ट कार्ड में ‘फेल’ हुए दावे, अब जनता मांग रही हिसाब
सिकंदरपुर की जनता अब सिर्फ कोरे आश्वासनों और चुनावी भाषणों से थक चुकी है। इस जमीनी रिपोर्ट कार्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय नेतृत्व जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। अब पूरे क्षेत्र में यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि जब तक सड़क, रेल, शिक्षा और स्वास्थ्य का ठोस समाधान नहीं होता, तब तक जनता शांत नहीं बैठेगी।