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ट्रेड वॉर के बीच डोनाल्ड ट्रंप का नया शिगूफा: न्यू मैक्सिको राज्य का नाम बदलकर ‘न्यू अमेरिका’ रखने का दिया सुझाव

विवेक ओझा
वाशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी आक्रामक राष्ट्रवाद की नीतियों और विवादास्पद घोषणाओं के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। इसी कड़ी में, उन्होंने अमेरिकी राजनीति और भूगोल से जुड़ा एक और बेहद चौंकाने वाला प्रस्ताव सामने रखा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के एक प्रमुख राज्य न्यू मैक्सिको (New Mexico) का नाम बदलकर ‘न्यू अमेरिका’ (New America) रखने का सुझाव दिया है। इस बयान ने अमेरिका के आंतरिक राजनीतिक गलियारों में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है।

हालांकि, उनके इस सुझाव को राज्य स्तर पर ज़रा भी तवज्जो नहीं मिली। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के इस प्रस्ताव को राज्य के गवर्नर द्वारा तत्काल खारिज कर दिया गया। अमेरिका के संघीय ढांचे में किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार सीधे तौर पर राष्ट्रपति के पास नहीं होता है, और गवर्नर की यह त्वरित प्रतिक्रिया राज्य की स्वायत्तता को दर्शाती है।

यह प्रस्ताव एक ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को भौगोलिक नामों पर भी थोपने का प्रयास कर रहा है। ‘न्यू मैक्सिको’ का नाम बदलने का यह सुझाव ठीक उस घटना के कुछ दिनों बाद आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ओंटारियो झील (Lake Ontario) का नाम बदलकर “लेक अमेरिका” (Lake America) करने के एक आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। लेक ओंटारियो का नाम बदलने का यह आदेश पड़ोसी देश कनाडा के साथ चल रहे एक व्यापार युद्ध (trade war) के बीचोबीच दिया गया था।

पड़ोसी देशों—कनाडा और मैक्सिको—से जुड़े नामों को ‘अमेरिका’ शब्द से बदलने की यह कवायद स्पष्ट रूप से एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। कनाडा के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच लेक ओंटारियो (जो अमेरिका और कनाडा के बीच की सीमा साझा करती है) का नाम बदलना और अब न्यू मैक्सिको (जिसके नाम में पड़ोसी देश मैक्सिको का ज़िक्र है) को ‘न्यू अमेरिका’ कहने का सुझाव देना, ट्रंप के कट्टर घरेलू समर्थकों को लुभाने की एक रणनीति प्रतीत होती है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के एकतरफा और उकसाने वाले फैसले पड़ोसी देशों के साथ अमेरिका के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को और अधिक जटिल बना सकते हैं।