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इंडोनेशिया: अनक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी फटने से जकार्ता हवाई अड्डे पर उड़ानें रद्द

विवेक ओझा
जकार्ता

प्रशांत महासागर के अति-संवेदनशील ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित इंडोनेशिया एक बार फिर से प्रकृति के विनाशकारी और खौफनाक प्रकोप का सामना कर रहा है। देश के सबसे कुख्यात और सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक के अचानक फटने से पूरे क्षेत्र में भारी दहशत और आपातकाल की स्थिति पैदा हो गई है। अनक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी के फटने (Anak Krakatau volcano erupts) के बाद सुरक्षा कारणों से इंडोनेशिया ने जकार्ता हवाई अड्डे पर उड़ानों को रद्द कर दिया है (cancels flights at Jakarta airport)। हवाई यातायात को रोकना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ज्वालामुखी से निकलने वाली राख और धुआं कितनी ऊंचाई तक पहुंच चुका है, जो विमानों के इंजनों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

इस ताज़ा भूगर्भीय हलचल ने इंडोनेशियाई नागरिकों के ज़ेहन में एक बेहद दर्दनाक और खौफनाक अतीत की यादें ताज़ा कर दी हैं। यह वही अनक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी है जिसके कारण कुछ ही साल पहले एक भयंकर मानवीय त्रासदी घटित हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में अनक क्राकाटाऊ के इसी तरह के एक विस्फोटक पतन (explosive collapse) के कारण समुद्र में एक विनाशकारी सुनामी आई थी (caused a tsunami in 2018)। उस अचानक आई सुनामी की लहरों ने सुमात्रा और जावा (Sumatra and Java) के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें कम से कम 430 लोगों की मौत हो गई थी (killed at least 430 people)।

वर्तमान विस्फोट की स्थिति भी बेहद डरावनी और तीव्र बनी हुई है। शनिवार, 5 सितंबर, 2026 (Saturday, Sept 5, 2026) को सामने आई तस्वीरों और भूगर्भीय रिपोर्टों में सुंडा जलडमरूमध्य (Sunda Strait) में हो रहे इस विस्फोट के दौरान धधकता हुआ लावा चमकता हुआ (Lava glows during eruption) स्पष्ट रूप से देखा गया है। रात के अंधेरे में आसमान को लाल रंग में रंगने वाला यह लावा ज्वालामुखी की गहराई में हो रही भारी उथल-पुथल का प्रमाण है।

लावा के साथ-साथ इस विस्फोट से निकलने वाले हानिकारक तत्व भी पर्यावरण और जनजीवन को प्रभावित कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, ज्वालामुखी की भारी राख (Volcanic ash) पश्चिमी हिस्सों (parts of western) में उड़कर फैल गई है (drifted across)। हवा में तैरती इस राख ने न केवल हवाई यातायात को पंगु बना दिया है, बल्कि यह आसपास के निवासियों के लिए गंभीर श्वसन समस्याओं का भी कारण बन सकती है। आपदा प्रबंधन एजेंसियां और भूविज्ञान केंद्र लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और तटीय इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि 2018 जैसी किसी भी अप्रत्याशित सुनामी की स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।