एफडीए आयुक्त के रूप में तुकाराम मुंडे के 100-दिन के कार्यकाल का प्रभाव: शिकायतों, जांच और जब्ती में हुई सैकड़ों प्रतिशत की भारी वृद्धि

मुंबई (राघवेंद्र प्रताप सिंह) :
महाराष्ट्र राज्य के प्रशासनिक ढांचे और जन स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली संस्थाओं के कार्यकलापों में एक बहुत ही सकारात्मक और आक्रामक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन में अपनी सख्त और नियम-बद्ध छवि के लिए पहचाने जाने वाले एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की कार्यप्रणाली ने राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग में हलचल मचा दी है। तुकाराम मुंडे महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त हैं, और उनके नेतृत्व में विभाग ने जो गति पकड़ी है, वह प्रशासनिक सुधारों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
हाल ही में, एफडीए आयुक्त के रूप में उनके 100-दिन के कार्यकाल (100-day stint) का डेटा सामने आया है, जिसने कई लोगों को चौंका दिया है। खाद्य और औषधि प्रशासन एक ऐसा विभाग है जिसका सीधा सरोकार आम जनता के स्वास्थ्य, खान-पान की गुणवत्ता और जीवनरक्षक दवाओं की प्रामाणिकता से होता है। इस विभाग में किसी भी प्रकार की सुस्ती या भ्रष्टाचार सीधे तौर पर नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ है। मुंडे के इस 100 दिनों के कार्यकाल के आंकड़े यह साबित करते हैं कि यदि शीर्ष स्तर पर इच्छाशक्ति हो, तो पूरी व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया जा सकता है।
आंकड़ों की गहराई में जाएं तो, वर्ष 2025-26 के डेटा के साथ तुलना करने पर पता चलता है कि पिछले तीन महीनों में प्राप्त शिकायतों की संख्या में 557% की वृद्धि देखी गई है। शिकायतों में 557 प्रतिशत का यह भारी उछाल इस बात का प्रमाण नहीं है कि अचानक बाज़ार में मिलावट बढ़ गई है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आम जनता का विभाग पर भरोसा बढ़ा है। जब नागरिकों को लगता है कि उनकी शिकायतों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई होगी, तो वे अधिक मुखर होकर सामने आते हैं।
शिकायतों के निवारण के मोर्चे पर भी विभाग का प्रदर्शन अभूतपूर्व रहा है। इसी अवधि में शिकायतों की जांच में 378% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि एफडीए के अधिकारियों और निरीक्षकों को अब फाइलों को दबाकर बैठने की अनुमति नहीं है। हर एक शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है और उसकी ज़मीनी पड़ताल सुनिश्चित की जा रही है।
अवैध खाद्य पदार्थों, नकली दवाओं और मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए विभाग ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। डेटा के अनुसार, तलाशी और जब्ती (searches and seizures) के मामलों में 217% की भारी वृद्धि हुई है। 217 प्रतिशत अधिक जब्ती का सीधा मतलब है कि बाज़ार से भारी मात्रा में ऐसा ज़हरीला या नकली माल हटाया गया है, जो आम आदमी की सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकता था।
तुकाराम मुंडे की कार्यशैली हमेशा से चर्चा का विषय रही है, और वे जहां भी जाते हैं, वहां ‘सिस्टम’ को जवाबदेह बनाने का प्रयास करते हैं। एफडीए जैसे महत्वपूर्ण विभाग में उनके द्वारा लाए गए इन बदलावों से न केवल जमाखोरों और मिलावटखोरों में खौफ पैदा हुआ है, बल्कि आम नागरिकों को भी यह विश्वास मिला है कि उनके द्वारा खाए जाने वाले भोजन और ली जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह 100 दिन का रिपोर्ट कार्ड इस बात का जीता-जागता सुबूत है कि प्रभावी नौकरशाही किस तरह से समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुरक्षित और पारदर्शी सेवाएं पहुंचा सकती है।