स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में यूपी के 16 शहरों का दबदबा, लखनऊ ने इंदौर को पछाड़कर हासिल किया पहला स्थान

लखनऊ ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) :स्वच्छ हवा की दिशा में उत्तर प्रदेश के लगातार प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कामयाबी मिली है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में प्रदेश के 16 शहरों ने अलग-अलग आबादी वर्गों में देशभर में अपनी जगह बनाई है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने 198 अंक हासिल कर इंदौर को पीछे छोड़ते हुए पहली बार देश में पहला स्थान प्राप्त किया। इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। सर्वेक्षण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराया गया।

बड़े शहरों की श्रेणी में यूपी के कई शहर आगे

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में आगरा 192 अंकों के साथ चौथे, गाजियाबाद 184 अंकों के साथ नौवें, कानपुर 183.2 अंकों के साथ 11वें और प्रयागराज 180 अंकों के साथ 13वें स्थान पर रहा। मेरठ 22वें और वाराणसी 34वें स्थान पर रहे। रैंकिंग से संकेत मिलता है कि प्रदेश के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।

फिरोजाबाद ने हासिल किया देश में दूसरा स्थान

मध्यम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया। फिरोजाबाद ने 195 अंक हासिल कर देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। शहर में कांच उद्योगों को स्वच्छ प्राकृतिक गैस ईंधन की ओर तेजी से स्थानांतरित करना प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। झांसी 192.5 अंकों के साथ पांचवें, जबकि मुरादाबाद और नोएडा 187.5-187.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे। गोरखपुर 22वें और बरेली 26वें स्थान पर रहा।

छोटे शहरों ने भी दर्ज कराई मजबूत मौजूदगी

तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायबरेली 180.5 अंकों के साथ 17वें स्थान पर रहा। अनपरा 29वें, खुर्जा 30वें और गजरौला 31वें स्थान पर रहे। इन शहरों में सड़क की धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों को महत्वपूर्ण माना गया।

सड़क की धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और यातायात व्यवस्था में सुधार जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया गया। नगर निगम की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1,100 इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। इसके अलावा 140 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है।

97 इलेक्ट्रिक स्वीपिंग मशीनें कर रहीं धूल नियंत्रण

सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें संचालित हैं। इसके साथ ही 559.85 किलोमीटर सड़कों को एंड-टू-एंड पक्का किया गया है। इससे सड़क की धूल के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिली है।

2,550 टीपीडी क्षमता से वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण

लखनऊ में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को भी स्वच्छ वायु रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। शहर में 2,550 टीपीडी क्षमता के साथ 100% वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण की व्यवस्था की गई है। खुले में कूड़ा जलाने की समस्या पर नियंत्रण के साथ कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया गया है।

हरियाली बढ़ाने के लिए मियावाकी और वर्टिकल गार्डन

शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए वर्टिकल गार्डन और मियावाकी पौधरोपण जैसे प्रयास किए गए हैं। परिवहन, सड़क, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए स्वच्छ हवा की रणनीति पर काम किया गया है।

लखनऊ बना दूसरे शहरों के लिए मॉडल

लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, जनता, पार्षदों और नगर निगम कर्मियों के सामूहिक प्रयासों को दिया है। राजधानी की यह सफलता अब प्रदेश के दूसरे शहरों के लिए भी स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई है।