यूपी में फिर लौटेंगे ‘दादी-नानी’ के जमाने वाले वो चमत्कारी पेड़! कैथा, खिरनी से लेकर बड़हल तक… विलुप्त हो रही ‘वन विरासत’ को जिंदा करने का बड़ा मास्टरप्लान

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ लखनऊ/उत्तर प्रदेश: क्या आपको अपने बचपन के वो खट्टे-मीठे कैथा, रसभरी खिरनी और बड़हल के स्वाद याद हैं? आधुनिकता और कंक्रीट के जंगलों की अंधी दौड़ में उत्तर प्रदेश से ये अनमोल और चमत्कारी पेड़ लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए थे। लेकिन अब यूपी वन विभाग ने प्रदेश की इस खोई हुई ‘वन विरासत’ (Forest Heritage) को वापस लाने के लिए एक ऐतिहासिक और भव्य मास्टरप्लान तैयार किया है। अब प्रदेश की आबोहवा में फिर से वही पारंपरिक मिठास और औषधीय खुशबू घुलने वाली है!

कंक्रीट के जंगलों में खो गए थे बेशकीमती पेड़, अब वन विभाग करेगा ‘संजीवनी’ का काम

दशकों से विदेशी और सिर्फ तेजी से बढ़ने वाले पौधों (जैसे यूकेलिप्टस) को बढ़ावा देने के कारण यूपी की मिट्टी में रचे-बसे पारंपरिक पेड़ धीरे-धीरे गायब हो गए। लेकिन अब वन विभाग ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। अब प्रदेश भर में उन खास पौधों की ‘स्पेशल नर्सरी’ तैयार की जा रही है, जो न केवल यहां के पर्यावरण के सबसे अनुकूल हैं, बल्कि जिनका स्वास्थ्य और आयुर्वेद में भी बहुत बड़ा महत्व है।

कैथा, खिरनी और बड़हल: लौटेंगे यूपी की मिट्टी के असली ‘ग्रीन हीरो’

वन विभाग के इस विशेष ‘पुनर्जीवन अभियान’ के तहत विलुप्त हो रही जिन प्रजातियों के संरक्षण और रोपण पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है, उनमें प्रमुख हैं:

  • कैथा (Wood Apple): पेट की गंभीर बीमारियों के लिए रामबाण और अपने अनोखे खट्टे-मीठे स्वाद के लिए मशहूर।
  • खिरनी और बड़हल: गर्मियों में कभी बच्चों की पहली पसंद रहे ये रसीले और पौष्टिक फल, जो अब बाजारों और गांवों से पूरी तरह गायब हो चुके हैं।
  • पारंपरिक और दुर्लभ प्रजातियां: इसके अलावा हरसिंगार, कदम, महुआ, और कई अन्य दुर्लभ औषधीय पौधों का पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा।

सिर्फ पौधे नहीं, लौट रही है प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान
यूपी वन विभाग की यह मुहिम सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों और उस समृद्ध प्राकृतिक विरासत की ओर लौटने का एक शानदार प्रयास है। इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों, स्कूलों और खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर इन पौधों को रोपा जाएगा और इनकी खास देखभाल की जाएगी।

अगर योगी सरकार और वन विभाग का यह अभियान सफल रहता है, तो यह उत्तर प्रदेश के पर्यावरण के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। वह दिन दूर नहीं जब हमारी आने वाली पीढ़ियां भी उन चमत्कारी पेड़ों की छांव और फलों का आनंद ले सकेंगी, जिन्हें हम लगभग किताबों के पन्नों में खो चुके थे।