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“विधानसभा भाषण के दौरान मेरा इशारा अनजाने में था”: एम.के. स्टालिन पर टिप्पणी विवाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सफाई

सरिता त्रिपाठी
चेन्नई

तमिलनाडु की राजनीति में शब्दों के बाण और ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ अक्सर राजनीतिक विमर्श को बेहद गरमागरम बना देते हैं। राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और कभी सिनेमा के रूपहले पर्दे पर राज करने वाले सी. जोसेफ विजय (C. Joseph Vijay) इन दिनों विपक्ष के तीखे हमलों का सामना कर रहे हैं। हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में उनके द्वारा दिए गए एक भाषण ने एक बड़े राजनीतिक और वैचारिक विवाद को जन्म दे दिया था। इस बढ़ते दबाव और आलोचनाओं के बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को स्पष्टीकरण देना पड़ा है कि विधानसभा में भाषण के दौरान उनका इशारा ‘अनजाने’ (inadvertent) में हुआ था।

यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा में बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कुछ शारीरिक भाव-भंगिमाओं (gesture) का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने जवाब (reply on the debate) के दौरान अनजाने में एक ऐसी भाव-भंगिमा का प्रयोग किया जिसे विपक्षी दलों ने घोर अपमानजनक माना। मुख्यमंत्री का यह स्पष्टीकरण सीपीआई (एम) के राज्य सचिव पी. शनमुगम (P. Shanmugam) द्वारा कड़ी आपत्ति जताने के बाद आया है। वामपंथी दलों और डीएमके (DMK) ने इसे राजनीतिक मर्यादाओं का सीधा उल्लंघन करार दिया।

सीपीआई (एम) नेता की यह कड़ी आपत्ति विजय द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन (M.K. Stalin) पर कथित ‘बॉडी-शेमिंग’ (body-shaming) करने को लेकर थी। राजनीति में वैचारिक मतभेद आम हैं, लेकिन जब ये मतभेद किसी नेता की शारीरिक चोटों या उसकी बनावट का मज़ाक उड़ाने के स्तर तक पहुंच जाएं, तो इसे लोकतांत्रिक विमर्श में बेहद निंदनीय माना जाता है।

यह ‘बॉडी-शेमिंग’ विवाद जिस ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है, वह भारतीय लोकतंत्र के सबसे काले अध्यायों में से एक है। यह इशारा कथित तौर पर उस टूटे हुए जबड़े (broken jaw) को लेकर था जो श्री स्टालिन को भारत में आपातकाल (Emergency) लागू होने के दौरान ‘मीसा’ (MISA) के तहत अपनी हिरासत के दौरान सहना पड़ा था। 1975 से 1977 तक के आपातकाल के दौरान, आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (Maintenance of Internal Security Act – MISA) के तहत हज़ारों राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया गया था और उन्हें पुलिस की क्रूर यातनाओं का सामना करना पड़ा था। एम.के. स्टालिन ने भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए उस दौर में पुलिस की भयानक बर्बरता झेली थी, जिसके कारण उनके शरीर पर स्थायी चोटें आई थीं।

एक ऐसे व्यक्ति की शारीरिक चोट का मज़ाक उड़ाना, जिसने लोकतंत्र के लिए पुलिसिया अत्याचार सहे हों, किसी भी राजनीतिक दल के लिए अस्वीकार्य है। यही कारण है कि सीपीआई (एम) और डीएमके ने इस पर इतनी तीव्र प्रतिक्रिया दी। एक अभिनेता से राजनेता बने मुख्यमंत्री विजय के लिए यह घटना एक बहुत बड़ा राजनीतिक सबक है। सिनेमा के मंच और विधानसभा के पटल की भाव-भंगिमाओं में ज़मीन-आसमान का अंतर होता है। मुख्यमंत्री का यह कहना कि उनका इशारा ‘अनजाने’ में था, स्थिति को शांत करने का एक कूटनीतिक प्रयास है। यह घटना स्पष्ट रूप से दिखाती है कि नए राजनेताओं को राज्य के राजनीतिक इतिहास और उसके संवेदनशील पन्नों के प्रति अधिक जागरूक और सजग रहने की आवश्यकता है।