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अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ा व्यापार युद्ध: ट्रंप प्रशासन ने कनाडाई सामानों पर लगाया भारी प्रतिबंध

विवेक ओझा
वाशिंगटन

वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर उत्तर अमेरिका के दो सबसे करीबी पड़ोसियों के बीच एक बड़ा और विनाशकारी ‘ट्रेड वॉर’ (व्यापार युद्ध) छिड़ गया है। ‘अमेरिका फर्स्ट’ की अपनी आक्रामक संरक्षणवादी नीतियों को आगे बढ़ाते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पड़ोसी देश कनाडा के खिलाफ कई बेहद कड़े आर्थिक कदम उठाए हैं। ताज़ा घटनाक्रम में, ट्रंप प्रशासन ने व्यापार युद्ध के गहराने के साथ ही कुछ कनाडाई सामानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम अमेरिका और कनाडा के बीच दशकों पुराने मुक्त व्यापार समझौतों की नींव को पूरी तरह से हिला कर रख देगा।

इस व्यापारिक विवाद ने हाल ही में तब एक गंभीर मोड़ ले लिया जब अमेरिकी प्रशासन ने कनाडाई उत्पादों के खिलाफ सीधे तौर पर दंडात्मक कार्रवाइयां शुरू कीं। व्हाइट हाउस ने मंगलवार (8 सितंबर, 2026) देर रात कनाडा के साथ अपने इस व्यापारिक विवाद को काफी बढ़ा दिया (ramped up)। दोनों देशों के बीच लंबे समय से लकड़ी (Lumber), एल्युमिनियम और डेयरी उत्पादों के टैरिफ को लेकर असहमति चल रही थी, लेकिन अब यह विवाद बातचीत की मेज़ से उठकर सीधे आयात प्रतिबंधों के स्तर तक पहुंच गया है। अमेरिका का तर्क है कि कनाडा अमेरिकी किसानों और उत्पादकों के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार कर रहा है, जिसका जवाब देना आवश्यक हो गया था।

अमेरिका द्वारा लागू किए गए इस नए आयात प्रतिबंध के निशाने पर कनाडा के कुछ प्रमुख निर्यात उद्योग हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आयात प्रतिबंध विशेष रूप से विभिन्न मादक पेय पदार्थों (alcoholic beverages) के साथ-साथ व्हे (whey) जैसे कुछ डेयरी उत्पादों को लक्षित करता है। कनाडाई शराब और डेयरी उद्योग के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि अमेरिकी बाज़ार उनके उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह सख्त आयात प्रतिबंध 29 सितंबर से पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा, जिससे दोनों देशों के सीमावर्ती व्यापार में भारी गिरावट आने की आशंका है।

प्रतिबंधों के अलावा, ट्रंप प्रशासन ने कनाडाई विनिर्माण क्षेत्र को चोट पहुंचाने के लिए भारी-भरकम सरचार्ज (अतिरिक्त शुल्क) की भी घोषणा की है। प्रशासन ने कहा है कि 15 सितंबर से मोटरबोट (motorboats) और गोल्फ कार्ट (golf carts) जैसे उत्पादों पर 50% का भारी सरचार्ज लगाया जाएगा। 50 प्रतिशत के इस अतिरिक्त शुल्क का सीधा अर्थ है कि अमेरिकी बाज़ार में ये कनाडाई उत्पाद इतने महंगे हो जाएंगे कि उनकी बिक्री लगभग नामुमकिन हो जाएगी। अमेरिका के इस आक्रामक कदम के बाद अब सभी की निगाहें कनाडाई सरकार पर टिकी हैं। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि कनाडा भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी कृषि उत्पादों और विनिर्मित वस्तुओं पर ‘जैसे को तैसा’ वाले टैरिफ थोप सकता है, जिससे दोनों देशों के उपभोक्ताओं को भारी महंगाई का सामना करना पड़ेगा।