मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों का आक्रोश: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मेडिकल इंटर्न्स का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी

अभिषेक सिंह
भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य सेवाएं एक गहरे संकट के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही हैं, क्योंकि राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देने वाले युवा डॉक्टरों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अपनी बुनियादी मांगों और आर्थिक हकों को लेकर मध्य प्रदेश के मेडिकल इंटर्न्स का विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है, जहां वे मुख्य रूप से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं और पुलिस ‘कार्रवाई’ की कड़ी निंदा कर रहे हैं। यह आंदोलन अब केवल एक मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस प्रशासन के रवैये ने इस आग में घी डालने का काम किया है।
सरकारी अस्पतालों की रीढ़ माने जाने वाले इन इंटर्न डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से आम मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस विरोध की आंच सबसे अधिक भोपाल स्थित सरकारी स्वामित्व वाले गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में महसूस की जा रही है, जहां डॉक्टरों ने मरीजों को देखने से साफ इनकार करते हुए ओपीडी (OPD) के पूर्ण बहिष्कार की घोषणा कर दी है। ओपीडी सेवाओं के ठप होने का सीधा असर उन सैकड़ों गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों पर पड़ रहा है, जो इलाज के लिए रोज़ाना दूर-दराज के इलाकों से इस बड़े अस्पताल का रुख करते हैं। मेडिकल इंटर्न्स का कहना है कि वे दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, लेकिन उन्हें जो आर्थिक मानदेय दिया जाता है वह उनकी मेहनत और उनके पद की गरिमा के हिसाब से बेहद कम है।
इस आंदोलन ने उस समय एक बेहद उग्र रूप ले लिया जब प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने पुलिस के सख्त रवैये का सामना किया। 9 सितंबर, 2026 को मध्य प्रदेश के भोपाल में कमला पार्क के पास मुख्यमंत्री आवास के करीब अपने मासिक स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर मेडिकल इंटर्न्स द्वारा एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री आवास के घेराव और अपनी आवाज़ को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने के इस प्रयास को पुलिस ने बलपूर्वक रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने उनके शांतिपूर्ण मार्च पर पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और पानी की बौछारों (वाटर कैनन) के उपयोग की तीखी आलोचना की है।
सड़कों पर बिछी कालीनों पर लेटे और पुलिस बैरिकेड्स का सामना करते हुए इन युवा डॉक्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार उनकी स्टाइपेंड बढ़ोतरी की मांग को लिखित रूप में स्वीकार नहीं कर लेती, तब तक उनका यह बेमियादी धरना और ओपीडी बहिष्कार जारी रहेगा। इस गतिरोध ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग और सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि यदि यह हड़ताल कुछ और दिनों तक खिंचती है, तो सरकारी अस्पतालों की आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह से चरमरा सकती हैं।