मतदाता सूची से नाम कटने पर गहराया राजनीतिक विवाद: पूर्व सांसद के पोते और KPCC पदाधिकारी को मिले नोटिस पर कांग्रेस ने जताई गंभीर चिंता

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
बेंगलुरु
भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूचियों (Electoral Rolls) की सटीकता सबसे अहम कड़ी मानी जाती है। हालांकि, हाल ही में मतदाता सूचियों के अद्यतनीकरण और एक नई ‘फैमिली मैपिंग’ प्रक्रिया को लेकर एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है जिसने चुनावी मशीनरी की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पूर्व सांसद के पोते और केपीसीसी (KPCC) पदाधिकारी को जारी किए गए एक नोटिस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। यह मामला केवल एक व्यक्ति के मतदाता पहचान पत्र का नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक प्रशासनिक विसंगति की ओर इशारा कर रहा है।
यह पूरा विवाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान सामने आया है। चुनाव अधिकारियों द्वारा जारी किए गए नोटिस के अनुसार, संबंधित पदाधिकारी का नाम परिवार मैपिंग रिकॉर्ड (family mapping records) में दर्ज नहीं है। फैमिली मैपिंग का उद्देश्य एक ही परिवार के सभी सदस्यों के मतदाता विवरण को एक साथ जोड़ना है ताकि बोगस वोटिंग को रोका जा सके। लेकिन इस विशिष्ट मामले में अधिकारियों की जांच प्रक्रिया में एक बेहद हास्यास्पद और गंभीर खामी उजागर हुई है। अधिकारियों को उनके पिता रिज़वान, उनकी मां और छोटे भाई के नामों के साथ कोई समस्या नहीं मिली है, जो उनके साथ एक ही घर में रहते हैं, और इन सभी परिवार वालों के नाम ड्राफ्ट रोल में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
एक ही छत के नीचे रहने वाले और एक ही परिवार के सदस्य होने के बावजूद, केवल एक व्यक्ति—जो कि एक सक्रिय राजनीतिक पदाधिकारी भी है—का नाम पारिवारिक रिकॉर्ड से गायब होना कोई मामूली तकनीकी त्रुटि नहीं मानी जा रही है। कांग्रेस पार्टी ने चुनाव अधिकारियों द्वारा जारी किए गए इस नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि जब माता-पिता और भाई के नाम उसी पते पर सत्यापित हो चुके हैं, तो उसी पते पर वर्षों से रह रहे एक सक्रिय नागरिक को अलग-थलग कर नोटिस भेजना प्रशासनिक दुर्भावना का संकेत देता है।
इस एकल घटना ने एक बहुत बड़े राजनीतिक तूफान को जन्म दे दिया है। कांग्रेस पार्टी ने यह गंभीर आरोप लगाया है कि यह घटना मतदाता सूचियों से योग्य मतदाताओं को बाहर निकालने के एक व्यापक प्रयास (wider attempt) का स्पष्ट संकेत है। विपक्षी दल का यह मानना है कि सत्तारूढ़ दल के इशारे पर चुनाव मशीनरी जानबूझकर ऐसे सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम या मैपिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है, जिससे विपक्षी दलों के समर्थकों या सक्रिय कार्यकर्ताओं के नाम सूची से हटाए जा सकें। चुनाव आयोग को अब न केवल इस विशेष मामले में बल्कि पूरे राज्य में चल रही फैमिली मैपिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सामने आना होगा, ताकि लोकतंत्र के इस सबसे बड़े महापर्व पर किसी भी प्रकार की धांधली के आरोप न लग सकें।