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दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता का नोएडा स्थित आवास पर निधन

द इंडियन व्यू टीम
नई दिल्ली / नोएडा

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रशासनिक और नौकरशाही हलकों में एक गहरी शोक की लहर दौड़ गई है। दिल्ली के समग्र विकास और उसके बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एक वरिष्ठ और अत्यंत अनुभवी पूर्व नौकरशाह अब हमारे बीच नहीं रहे। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता (Former Delhi Chief Secretary Rakesh Mehta) अपने नोएडा स्थित आवास पर मृत पाए गए हैं। उनके इस तरह अचानक और दुखद निधन की खबर ने पूरे प्रशासनिक तंत्र और उन सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया है जिन्होंने उनके साथ काम किया था।

राकेश मेहता एक बेहद सुलझे हुए, दूरदर्शी और परिणामोन्मुखी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी थे। उनका कार्यकाल दिल्ली के इतिहास के सबसे परिवर्तनकारी दौर में से एक माना जाता है। आधिकारिक जानकारी और उनके सेवा रिकॉर्ड के अनुसार, राकेश मेहता ने 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सरकार के दौरान दिल्ली के मुख्य सचिव का पदभार संभाला था। यह वह समय था जब दिल्ली 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) की तैयारी कर रही थी और शहर के बुनियादी ढांचे, परिवहन और पर्यावरण नीतियों में बड़े पैमाने पर सुधार किए जा रहे थे।

एक मुख्य सचिव के रूप में, राकेश मेहता ने राज्य सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच एक बेहतरीन पुल का काम किया। उन्होंने नवंबर 2010 में अपनी सेवानिवृत्ति तक इस शीर्ष प्रशासनिक पद पर अपनी सेवाएं दीं। उनके तीन साल के इस कार्यकाल के दौरान ही दिल्ली में कई नए फ्लाईओवर, दिल्ली मेट्रो का भारी विस्तार और सीएनजी आधारित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को पूर्णतः लागू करने जैसी कई जटिल परियोजनाओं को अमली जामा पहनाया गया। शीला दीक्षित सरकार की सफलताओं में उनके द्वारा स्थापित की गई सुदृढ़ प्रशासनिक नींव का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है।

हालांकि, उनके जीवन का अंतिम पड़ाव अत्यधिक पीड़ादायक और संघर्षपूर्ण रहा। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद, इस ‘चरम कदम’ (extreme step) के पीछे के कारण के रूप में “लंबी बीमारी” (prolonged illness) का हवाला दिया गया है। यह ‘चरम कदम’ इस बात की ओर इशारा करता है कि संभवतः उन्होंने गंभीर और लाइलाज स्वास्थ्य समस्याओं से त्रस्त होकर स्वयं अपना जीवन समाप्त करने का हृदयविदारक निर्णय लिया।

यह घटना हमारे समाज के सामने वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त अधिकारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर बहस को भी सामने लाती है। अक्सर जीवन भर अत्यधिक सक्रिय और शक्ति-संपन्न पदों पर रहने वाले अधिकारी जब सेवानिवृत्ति के बाद एकांत और लंबी व कष्टदायक बीमारियों का सामना करते हैं, तो वे गहरे अवसाद में चले जाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का बीमारी से हार मान लेना, जिसने कभी पूरे राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को ऊर्जावान तरीके से चलाया हो, बेहद दुखद है। दिल्ली सरकार के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों ने राकेश मेहता के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और दिल्ली के शहरी विकास में उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।