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वंदे भारत एक्सप्रेस ने मंगलुरु-बेंगलुरु ट्रायल रन में रचा नया इतिहास

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ मंगलुरु / बेंगलुरु: भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और रेल नेटवर्क की गति को बढ़ाने के अथक प्रयासों में एक और शानदार अध्याय जुड़ गया है। कर्नाटक राज्य के महत्वपूर्ण तटीय शहर मंगलुरु को राज्य की राजधानी और प्रमुख आईटी हब बेंगलुरु से जोड़ने वाले रेल मार्ग पर एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता हासिल हुई है। 10 सितंबर को आयोजित किए गए एक महत्वपूर्ण रन टाइम परीक्षण (run time trial) के दौरान, वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) ने मंगलुरु-बेंगलुरु के बीच की दूरी को मात्र 6.49 घंटे में पूरा कर लिया है। यह नया रिकॉर्ड राज्य के भीतर परिवहन के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।

इस ट्रायल रन के दौरान रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन की गति, पटरियों की भार-वहन क्षमता और पश्चिमी घाट के घुमावदार व जटिल पहाड़ी रास्तों पर ट्रेन के संतुलन का बहुत बारीकी से तकनीकी परीक्षण किया। आधिकारिक जानकारी और रेलवे रिपोर्टों के अनुसार, यशवंतपुर-मंगलुरु जंक्शन (Yeshwantpur-Mangaluru Junction) के बीच किया गया यह परीक्षण सुबह 7.05 घंटे में ही पूरा कर लिया गया, जबकि इसके लिए पहले से 8 घंटे का समय निर्धारित किया गया था। निर्धारित समय से लगभग एक घंटे पहले सफर पूरा करना इस स्वदेशी सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन की उत्कृष्ट इंजीनियरिंग और रेलवे के बेहतर ट्रैक प्रबंधन का एक बेहद स्पष्ट प्रमाण है।

इस विशेष ट्रायल रन को संचालित करने के लिए 16-कोच वाले रेक (16-coach rake) का उपयोग किया गया था। यह पूरी तरह से वातानुकूलित और अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस ट्रेन 10 सितंबर, 2026 को मंगलुरु जंक्शन पर पहुंची। ट्रेन के बेहतरीन प्रदर्शन का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह रन टाइम ट्रायल के दौरान दोपहर 1.35 बजे ही पहुंच गई, जबकि इसके पहुंचने का निर्धारित समय दोपहर 2.50 बजे था।

मंगलुरु और बेंगलुरु के बीच की भौगोलिक दूरी और विशेषकर सकलेशपुर और सुब्रह्मण्य रोड के बीच पड़ने वाले ‘घाट सेक्शन’ के कारण इस मार्ग पर रेल यात्रा हमेशा से काफी समय लेने वाली रही है। इस घाट सेक्शन में तीव्र ढलान और घने जंगल मौजूद हैं, जहां सुरक्षा कारणों से ट्रेन की गति को काफी सीमित रखना पड़ता है। इसके बावजूद, वंदे भारत एक्सप्रेस द्वारा इस चुनौतीपूर्ण मार्ग पर अपनी यात्रा इतने कम समय में पूरी करना एक बहुत बड़ी तकनीकी और परिचालन उपलब्धि मानी जा रही है।

इस बहुप्रतीक्षित सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन के नियमित वाणिज्यिक संचालन से तटीय कर्नाटक और बेंगलुरु के बीच व्यापार, शिक्षा और पर्यटन को एक अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। आईटी पेशेवरों, छात्रों और व्यवसायियों के लिए यह एक बेहद आरामदायक और समय बचाने वाला यात्रा विकल्प साबित होगा। यह सफलता यह भी दर्शाती है कि भारतीय रेलवे केवल नई ट्रेनों की शुरुआत ही नहीं कर रहा है, बल्कि पटरियों को भी वैश्विक मानकों के अनुरूप अपग्रेड कर रहा है।