Trending

देशव्यापी बैंक हड़ताल की घोषणा: 11 सितंबर से बैंकिंग सेवाएं होंगी बुरी तरह प्रभावित

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: भारत के बैंकिंग सेक्टर और अर्थव्यवस्था के सुचारू संचालन को एक बड़ा झटका लगने वाला है। अपनी पुरानी और लंबित मांगों को लेकर देश भर के बैंक कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर होने जा रही इस हड़ताल से देश भर में वित्तीय लेन-देन, चेक क्लीयरेंस और एटीएम सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है। 11 सितंबर को होने वाली इस बैंक कर्मचारियों की हड़ताल (Bank employees’ strike on September 11) के कारण देश भर में बैंकिंग सेवाओं के प्रभावित होने की पूरी संभावना है (Services likely to be hit)।

बैंक कर्मचारियों और यूनियनों का मुख्य रोष सरकार और भारतीय बैंक संघ (IBA) के टालमटोल वाले रवैये को लेकर है। इस देशव्यापी हड़ताल के पीछे कई प्रमुख मांगें शामिल हैं। बैंक यूनियनों की मांगों में सबसे ऊपर 5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह (five-day banking week) लागू करने की मांग शामिल है। इसके अलावा, प्रदर्शन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं पर गंभीर मतभेद (differences over performance-linked incentive schemes) भी इस हड़ताल का एक बड़ा कारण हैं।

यूनियनों का तर्क है कि पीएलआई योजना (PLI scheme review) के वर्तमान मापदंड कर्मचारियों के लिए अनुचित हैं और इनमें तुरंत समीक्षा की आवश्यकता है। इन दो मुख्य मांगों के साथ-साथ, पेंशन से संबंधित मुद्दों (pension-related issues) सहित कई अन्य लंबित मांगें (several other pending demands) भी हैं जिन पर लंबे समय से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल की रूपरेखा और आंदोलन की रणनीति को स्पष्ट करने के लिए, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (United Forum of Bank Unions) के सदस्यों ने 1 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस (press conference in New Delhi on September 1, 2026) को संबोधित किया था। मंच से जारी बैनर और बयानों से स्पष्ट है कि यदि 11 सितंबर की इस चेतावनी हड़ताल के बाद भी उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो यूनियनें 28 और 29 सितंबर को एक और हड़ताल करेंगी, और अंततः 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी।

यह हड़ताल ऐसे समय में हो रही है जब त्योहारी सीज़न नज़दीक आ रहा है और अर्थव्यवस्था में नगदी का प्रवाह तेज़ होता है। लगातार हड़तालों के कारण न केवल आम जनता को नकदी निकालने और जमा करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा, बल्कि आयात-निर्यात और कॉरपोरेट लेन-देन भी बुरी तरह से ठप हो जाएंगे। सरकार और आईबीए पर अब यह भारी दबाव है कि वे जल्द से जल्द बैंक यूनियनों के साथ संवाद स्थापित करें और 5-दिवसीय कार्य सप्ताह जैसी जायज़ मांगों पर एक सर्वमान्य समाधान निकालें, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को इस बड़े झटके से बचाया जा सके।