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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: दिल्ली में 35 विशेष विमानों और हवाई यातायात का कुशल प्रबंधनवीवीआईपी के लिए अलग अराइवल व्यवस्था, वाणिज्यिक उड़ानों के समय में किया गया फेरबदल

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक आयोजनों में से एक, ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रही है। इतने बड़े पैमाने पर राष्ट्राध्यक्षों और वैश्विक नेताओं के आगमन ने दिल्ली के हवाई अड्डे और सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक अभूतपूर्व लॉजिस्टिक और हवाई यातायात प्रबंधन की चुनौती पेश की है। रिपोर्टों के अनुसार, यह विस्तार से बताया गया है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली 35 विशेष विमानों और हवाई यातायात का प्रबंधन कैसे कर रही है। एक ही समय में इतने सारे विशेष विमानों को सुरक्षित रूप से उतारना, पार्क करना और साथ ही आम नागरिकों के लिए वाणिज्यिक उड़ानों को सुचारू रूप से जारी रखना एक बेहद जटिल कार्य है, जिसे नागरिक उड्डयन अधिकारियों द्वारा अत्यंत कुशलता से अंजाम दिया जा रहा है।

इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले वैश्विक नेताओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए, वीवीआईपी अलग आगमन सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इससे न केवल वीवीआईपी मेहमानों को भारी सुरक्षा और निजता मिलती है, बल्कि आम यात्रियों के टर्मिनलों पर भीड़भाड़ और असुविधा को भी कम किया जा सकता है। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि राष्ट्राध्यक्षों का काफिला सीधे उनके विशेष विमान से निकलकर सुरक्षित मार्गों से उनके होटलों तक पहुंच सके, बिना किसी सार्वजनिक हस्तक्षेप के।

हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) के लिए सबसे बड़ी चुनौती विशेष उड़ानों और नियमित यात्री उड़ानों के बीच संतुलन स्थापित करना है। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए, वाणिज्यिक उड़ानों का समय विशेष विमानों की आवाजाही के अनुसार तय किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि जब भी किसी वीवीआईपी विमान का आगमन या प्रस्थान होता है, तो उस समय के दौरान वाणिज्यिक उड़ानों को हवा में होल्ड पर रखा जाता है या उनके समय में मामूली बदलाव किया जाता है, ताकि वीवीआईपी विमानों को सुरक्षित एयरस्पेस मिल सके। इस सुचारू समन्वय के कारण यात्रियों को न्यूनतम देरी का सामना करना पड़ रहा है।

इतनी बड़ी संख्या में विशेष विमानों की पार्किंग भी एक गंभीर मुद्दा था, जिसे कई हवाई अड्डों के समन्वय से हल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, विदेशी विमानों को पार्क करने के लिए कई हवाई अड्डों का उपयोग किया जा रहा है। यह विशाल ऑपरेशन केवल एक हवाई अड्डे तक सीमित नहीं है; यह ऑपरेशन इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, भारतीय वायु सेना के पालम तकनीकी क्षेत्र और विदेशी विमानों को पार्क करने के लिए उपयोग किए जा रहे अन्य हवाई अड्डों तक फैला हुआ है। 12 सितंबर, 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे हवाई यातायात नियंत्रण नेटवर्क ने भारत की बढ़ती ढांचागत क्षमता और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को निर्बाध रूप से आयोजित करने की इसकी शक्ति को वैश्विक पटल पर साबित किया है।