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1,857 खाली सुपर-स्पेशलिटी मेडिकल सीटों पर गहराया संकट: डीएमके अध्यक्ष स्टालिन ने पीएम मोदी से की हस्तक्षेप की मांग

‘मेडिकल सीटें बहुमूल्य राष्ट्रीय संपत्ति, विशेषज्ञ डॉक्टरों की आवश्यकता के बीच इन्हें बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता’

विवेक ओझा/ चेन्नई: भारत जैसे विशाल और घनी आबादी वाले देश में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की मांग हमेशा से आपूर्ति से कहीं अधिक रही है। कोरोना महामारी के बाद से देश ने अपने स्वास्थ्य ढांचे और विशेषज्ञ डॉक्टरों (Specialist Doctors) की भारी कमी को बहुत करीब से महसूस किया है। ऐसे गंभीर समय में, जब देश के नागरिक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में एक बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में सुपर-स्पेशलिटी सीटें खाली पड़ी हैं। इस राष्ट्रीय क्षति को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन (M.K. Stalin) ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। डीएमके अध्यक्ष स्टालिन ने 1,857 रिक्त सुपर-स्पेशलिटी मेडिकल सीटों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

सुपर-स्पेशलिटी मेडिकल कोर्स (जैसे DM और MCh) को पूरा करना एक डॉक्टर के जीवन की सबसे कठिन और लंबी यात्रा होती है। ये सीटें बहुत ही सीमित संख्या में होती हैं और इन्हें तैयार करने में सरकार को करोड़ों रुपये का भारी निवेश करना पड़ता है। इन सीटों का खाली रह जाना न केवल संसाधनों की भारी बर्बादी है, बल्कि यह भविष्य के उन हज़ारों मरीजों के साथ भी अन्याय है जिन्हें कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी या ऑन्कोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ इलाज की सख्त आवश्यकता है। 11 सितंबर, 2026 को चेन्नई से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, स्टालिन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए केंद्र सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील की है।

स्टालिन ने अपने बयान में देश की चिकित्सा आवश्यकताओं और खाली पड़ी सीटों के बीच के विरोधाभास को बेहद कड़े शब्दों में रेखांकित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि, “एक भी मेडिकल सीट, जो कि एक बहुमूल्य राष्ट्रीय संपत्ति है, को बर्बाद नहीं होने दिया जाना चाहिए, जबकि हमारे लोगों को अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की आवश्यकता है”। एक ‘बहुमूल्य राष्ट्रीय संपत्ति’ (precious national asset) के रूप में मेडिकल सीटों का उल्लेख करना इस बात को पुष्ट करता है कि यह केवल कुछ छात्रों के भविष्य का सवाल नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की स्वास्थ्य सुरक्षा का मामला है।

मेडिकल शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुपर-स्पेशलिटी सीटों के खाली रहने के पीछे अत्यधिक उच्च कट-ऑफ अंक, अत्यधिक महंगी फीस, और काउंसलिंग प्रक्रिया में मौजूद तकनीकी खामियां मुख्य कारण हो सकती हैं। कई बार योग्य उम्मीदवार भारी फीस के कारण इन सीटों पर प्रवेश नहीं ले पाते हैं, जबकि सरकारें कट-ऑफ को कम करने में संकोच करती हैं। मुख्यमंत्री स्टालिन का यह हस्तक्षेप इस बात की मांग करता है कि केंद्र सरकार और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) को तुरंत कट-ऑफ अंकों की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग का एक अतिरिक्त मॉप-अप राउंड (Mop-up round) आयोजित करना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एक भी मूल्यवान सीट खाली न रहे।