शी जिनपिंग के बाद चीन के ‘नंबर दो’ काई क्यूई भी दिल्ली पहुंचे, भविष्य में संभाल सकते हैं देश की कमान!

New Delhi : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। साल 2019 में चेन्नई के निकट मामल्लपुरम में हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता के बाद जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। गलवान घाटी की झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। जिनपिंग के साथ इस दौरे पर उनके प्रतिनिधिमंडल में चीन के विदेश मंत्री और सीपीसी केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य वांग यी भी शामिल हैं।इस हाई-प्रोफाइल दौरे पर सबकी निगाहें शी जिनपिंग के साथ आए एक लंबे कद और सफेद बालों वाले वरिष्ठ अधिकारी पर टिकी हैं, जो चीन के दूसरे सबसे शक्तिशाली नेता और जिनपिंग के ‘राइट-हैंड’ माने जाने वाले काई क्यूई हैं। लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले काई क्यूई हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काफी सक्रिय नजर आए हैं। पिछले साल तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया में जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान भी वे मौजूद थे और इस साल जब ट्रंप चीन दौरे पर पहुंचे, तो सबसे पहले हाथ मिलाने वाले चीनी अधिकारी काई क्यूई ही थे।बिना इंतजार के तय किया सत्ता का सफरचीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के भीतर काई क्यूई का शीर्ष पद तक पहुंचना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता है। बीजिंग के मेयर के रूप में कुछ ही महीने काम करने के बाद उन्हें सीधे बीजिंग कम्युनिस्ट पार्टी का प्रमुख बना दिया गया था। इसके बाद, पोलित ब्यूरो में शामिल होने के लिए आमतौर पर लगने वाले 5 साल के अनिवार्य इंतजार को दरकिनार करते हुए उन्हें सीधे 2017 में देश की दूसरी सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली इकाई ‘पोलित ब्यूरो’ में शामिल कर लिया गया और 2022 में वे पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी का हिस्सा बन गए।भविष्य में बन सकते हैं राष्ट्रपतिमौजूदा समय में 70 वर्षीय काई क्यूई सीपीसी के जनरल ऑफिस के प्रमुख हैं, जो कि शी जिनपिंग के ‘डिफैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ’ के रूप में कार्य करते हैं। इसके साथ ही, वे पार्टी की विचारधारा तय करने वाले प्रतिष्ठित संस्थान ‘सेंट्रल आइडियोलॉजी स्कूल’ के भी प्रमुख हैं। पार्टी के भीतर उनके इस तेजी से बढ़ते रसूख और जिनपिंग के साथ उनकी गहरी नजदीकी को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक यह अनुमान लगा रहे हैं कि काई क्यूई भविष्य में चीन के राष्ट्रपति पद के सबसे प्रबल दावेदार बन सकते हैं।