ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: नई दिल्ली घोषणापत्र जारी, यूएई और ईरान कड़े रुख से हटे पीछे

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हो रहे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक कूटनीति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक उथल-पुथल, विशेषकर मध्य पूर्व के गहराते संकट और महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, इस शिखर सम्मेलन के निष्कर्षों पर पूरी दुनिया की नज़रें टिकी हुई थीं। कूटनीतिक वार्ताओं के एक गहन दौर के बाद, 11-सदस्यीय ब्रिक्स समूह ने 12 सितंबर, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक में नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाया। इस घोषणापत्र को भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। ब्रिक्स ने अपना यह नया दिल्ली घोषणापत्र सफलतापूर्वक जारी किया, क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान जैसे प्रमुख देश अपने पहले के कड़े रुख से पीछे हट गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बेहद प्रतिष्ठित और विस्तारित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में एक अत्यंत संतुलित, पारदर्शी और समावेशी वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए, प्रधानमंत्री ने पश्चिमी देशों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने मंच से स्पष्ट रूप से कहा कि यह समूह “किसी के खिलाफ नहीं” है। इस बयान का मुख्य उद्देश्य उन चिंताओं को कम करना था, जिनमें यह माना जा रहा था कि रूस और चीन के प्रभाव में विस्तारित ब्रिक्स एक ‘एंटी-वेस्ट’ (पश्चिम-विरोधी) गुट के रूप में आकार ले रहा है। भारत ने यह सुनिश्चित किया कि यह मंच पूरी तरह से आर्थिक सहयोग, तकनीकी विकास और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की प्रगति पर केंद्रित रहे।
इस बहुपक्षीय आयोजन के दौरान, नई दिल्ली द्विपक्षीय कूटनीति का भी एक प्रमुख केंद्र बनी रही। इस शिखर सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कूटनीतिक घटनाक्रम में, प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक घंटे तक लंबी द्विपक्षीय बैठक की। दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच यह विस्तृत बातचीत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय से चले आ रहे सैन्य गतिरोध और सीमा विवादों की पृष्ठभूमि में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शिखर सम्मेलन और नई दिल्ली घोषणापत्र का एक और सबसे ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दा मध्य पूर्व का हिंसक संघर्ष रहा। गाजा और आसपास के क्षेत्रों में चल रही सैन्य कार्रवाइयों को लेकर, इस घोषणापत्र में इज़राइल को कड़ी फटकार लगाई गई है। हालांकि, एक व्यापक सर्वसम्मति बनाने और कूटनीतिक भाषा की बारीकियों का ध्यान रखते हुए, इस दस्तावेज़ में कुछ खास रणनीतियों को अपनाया गया। घोषणापत्र में युद्ध में “अधिकतम संयम” बरतने का स्पष्ट आह्वान किया गया है, लेकिन इसमें किसी भी पक्ष द्वारा किए गए हमलों का कोई विशिष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
यह कूटनीतिक सफलता तब संभव हो पाई जब मध्य पूर्व की राजनीति में विरोधी ध्रुव माने जाने वाले ईरान और यूएई ने सम्मेलन की व्यापक सफलता के लिए आपसी मतभेदों को किनारे रखा। विस्तारित ब्रिक्स अब दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। नई दिल्ली में सर्वसम्मति से पारित यह घोषणापत्र इस बात का ठोस प्रमाण है कि ब्रिक्स अब केवल एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति को दिशा देने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली और निर्णायक ब्लॉक बन चुका है।