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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पर्दे के पीछे छिपाई गई दिल्ली की झुग्गियां

सौंदर्यीकरण के नाम पर गरीबों को पर्दे से ढका गया; निवासियों ने सरकार से जताई गहरी नाराज़गी

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली

भारत की राजधानी नई दिल्ली वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक आयोजनों में से एक, ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रही है। शहर को विदेशी मेहमानों के सामने एक विश्व स्तरीय महानगर के रूप में पेश करने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां और सौंदर्यीकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि, इस चकाचौंध और कूटनीतिक सफलता के पीछे की एक बहुत ही जमीनी और कड़वी सच्चाई सामने आई है। इस उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए दक्षिण दिल्ली में स्थित एक झुग्गी बस्ती को पर्दे से पूरी तरह से ढक दिया गया है। यह कदम उन गरीबों के लिए अपमानजनक माना जा रहा है जिन्हें शहर के विकास की धुरी माना जाता है।

नई दिल्ली के वसंत विहार इलाके में ‘कुली कैंप’ (Coolie Camp) के नाम से जानी जाने वाली इस बस्ती के इर्द-गिर्द नीले और सफेद रंग के विशाल पर्दे लगा दिए गए हैं। यह वही रास्ता है जहां से विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और राष्ट्राध्यक्षों के काफिले के गुजरने की भारी संभावना है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना प्रतीत होता है कि विदेशी मेहमानों की नज़र शहर की गरीबी और इन झुग्गी-झोपड़ियों पर न पड़े। जब भी भारत में कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन होता है, तो अक्सर सौंदर्यीकरण के नाम पर शहर की गरीबी को इसी तरह टिन शेड या बड़े-बड़े पोस्टरों से छिपाने की एक परंपरा सी बन गई है। यह एक ऐसी वास्तविकता है जिसे स्वीकार करने के बजाय छिपाना आसान समझा जाता है।

इस अमानवीय और असंवेदनशील कार्रवाई को लेकर कुली कैंप के निवासियों में भारी रोष और निराशा देखने को मिल रही है। झुग्गी-झोपड़ियों को इस तरह से छिपाने की सरकारी कार्रवाई पर निवासियों ने अपनी गहरी नाराज़गी और हताशा व्यक्त की है। उनका तर्क है कि सरकार को उनकी गरीबी को छिपाने पर पैसा खर्च करने के बजाय उन कल्याणकारी कार्यक्रमों में निवेश करना चाहिए जो वास्तव में इन समुदायों को गरीबी से बाहर निकाल सकें।

यह पहली बार नहीं है जब देश में ऐसा कुछ हुआ हो, लेकिन हर बार यह गंभीर सवाल जरूर उठता है कि क्या गरीबी को पर्दे से ढकने से वह खत्म हो जाएगी? निवासियों का कहना है कि सरकार को उनके लिए पक्के मकान, स्वच्छ पेयजल, और बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करने चाहिए। जब विदेशी मेहमान आते हैं तो उनके सामने ‘चमकता हुआ भारत’ पेश करने की कोशिश की जाती है, लेकिन उस चमक के पीछे जो अंधेरा है, उसे दूर करने के लिए ठोस नीतियां बनाने की आवश्यकता है। श्रीमंसी कौशिक (SHRIMANSI KAUSHIK) द्वारा 13 सितंबर, 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान यह दृश्य शहर की भारी असमानता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। सरकार को केवल विदेशी मेहमानों के लिए नहीं, बल्कि अपने नागरिकों के लिए भी एक बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पर्दे लगाकर गरीबी को छुपाना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता।